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१८. ॥ अथ श्रीमीनाक्षीमणिमालाष्टकम् ॥
 
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मधुरापुरनायिके नमस्ते मधुराला पशुकाभिरामहस्ते ।

मलयध्वजपाण्ड्यराजकन्ये मयि मीनाक्षि कृपां निधेहि धन्ये ॥ १ ॥
 
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कचनिर्जितकालमेघकान्ते कमलासेवितपादपङ्कजान्ते ।
 

मधुरापुरवल्लभेष्टकान्ते मयि मीनाक्षि कृपां निवेहि दान्ते ॥ २ ॥
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कुचयुग्म विभिन्नचक्रवाके कृपया पालितसर्वजीवलोके ।

मलयध्वजसन्ततेः पताके मयि मीनाक्षि कृपां निवेहि पाके ॥ ३ ॥
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तपनीयसरोजिनीतटस्थे तुहिनप्रायमहीधरोदरस्थे ।
 

मदनारिपरिग्रहे कृतार्थे मयि मीनाक्षि कृपां निवेहि साथैर्थे ॥ ४ ॥
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मधुवैरिविरिञ्चिमुख्यसेव्ये मनसा भावितचन्द्रमौलिसव्ये ।

मनसा पनिहीत यज्ञहव्ये मयि मीनाक्षि कृपां निवेहि भव्ये ॥ ५ ॥
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कलकीर कलोक्तिनाददक्षे कलितानेकजगन्निवासकुक्षे ।
 

मदनाशु गहल्लकान्तपाणे मयि मीनाक्षि कृपां निधेहि शोणे ॥ ६ ॥
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विधिवाहनचैत्रकेलियाने विमतामोटनपूजितापदाने ।

मधुरेक्षण भावपूतमीने मयि मीनाक्षि कृपां निधेहि दीने ॥ ७ ॥
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जगदम्ब कदम्बमूलवासे मधुरा मोदमुखेन्दुमन्दहासे ।

मदमन्दिर चारुदृग्विलासे मयि मीनाक्षि कृपां निधेहि दासे ॥ ८ ॥
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पठतामनिशं प्रभातकाले मणिमालाष्टकमष्टभूतिदायि ।

घटिकाशतचातुरी समिन्धे करुणा पूर्णकट (टाक्षसन्निवेशात् ॥ ९ ॥
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॥ इति श्रीमीनाक्षीमणिमालाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
 
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१९. ॥ अथ श्री कल्याणस्तवराजः ॥
 
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कल्याणवृष्टिभिरिवामृतपूरिताभि-
 

र्
लक्ष्मीस्वयंवरणमङ्गलदीपिकाभिः ।
 

सेवाभिरम्ब तव पादसरोजमूले
 

नाकारि किं मनसि भक्तिमतां जनानाम् ॥ १ ॥
 
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