Proofing

2026-04-07 05:05:30 by akprasad

This page has been fully proofread once and needs a second look.

<page>
<ignore>
६५४
 
देवीस्तोत्रेषु
 
</ignore>
<verse>
चारुप्रसन्नमदनां चन्द्रशेखरवल्लभाम् ।
 

विद्यां देहि महामाये वन्दे त्वां वृषवाहिनीम् ॥ ९॥
</verse>
<verse>
आर्याष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् सततं नरः ।

महादेवीप्रसादेन षण्मासात् स कविर्भवेत् ॥ १० ॥
</verse>
<trailer text="4_END">
॥ इति श्री आर्याष्टकं सम्पूर्णम् ॥
 
</trailer>
<footnote text="5_START">
५.
 
॥ अथ श्रीत्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रम् ॥
 
</footnote>
<verse>
श्वेतपद्मासनारूढां शुद्धस्फटिकसन्निभाम् ।
 

वन्दे वाग्देवतां ध्यात्वा देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ १ ॥
 
</verse>
<verse>
शैलाधिराजतनयां शङ्करप्रियवल्लभाम् ।
 

तरुणेन्दुनिभां वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ २ ॥
 
</verse>
<verse>
सर्वभूतमनोरम्यां सर्वभूतेषु संस्थिताम् ।
 

सर्वसंपत्करीं वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ ३ ॥
</verse>
<verse>
पद्मालयां पद्महस्तां पद्मसम्भवसेविताम् ।

पद्मरागनिभां वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ ४॥
 
</verse>
<verse>
पञ्चबाणधनुर्बाणपाशाङ्कुशधरां शुभाम् ।

पञ्चब्रह्ममयीं वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ ५ ॥
</verse>
<verse>
षट् पुण्डरीकनिलयां षडाननसुतामिमाम् ।

षट्कोणान्तःस्थितां वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ ६ ॥
 
</verse>
<verse>
हरार्धभागनिलयामम्बामद्रिसुतां मृडाम् ।
 

हरिप्रियानुजां वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ ७ ॥
 
</verse>
<verse>
अष्टैश्वर्यप्रदामम्बामष्टदिक्पालसेविताम् ।
 

अष्टमूर्तिमयीं वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ ८॥
 
</verse>
<verse>
नवमाणिक्यमकुटां नवनाथ सुपूजिताम् ।
 

नवयौवनशोभाढ्यां वन्दे त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ ९ ॥
 
</verse>
<verse>
कानीञ्चीवासमनोरम्यां काञ्चीदामविभूषिताम् ।

कालीपुरीश्वरीं वन्दे देवीं त्रिपुरसुन्दरीम् ॥ १० ॥
</verse>
<trailer text="5_END">
॥ इति श्रीत्रिपुरसुन्दरीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
 
</trailer>
</page>