Stotrarnava /684
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<ignore>॥ श्रीसुब्रह्मण्यस्तोत्राणि ॥
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<title>१. ॥ अथ श्रीसुब्रह्मण्यषट्कम् ॥
</title>
<verse>शरणागतमातुरमाधिजित
तं
करुणाकर कामद कामहतम् ।
शरकाननसम्भव चारुरुचे
परिपालय तारकमारक माम् ॥ १ ॥
</verse>
<verse>हरसारसमुद्भव हैमवती-
करपल्लवलालित कम्रतनो ।
मुरवैरिविरिञ्चिमुदम्बुनिधे
परिपालय तारकमारक माम् ॥ २ ॥
</verse>
<verse>शरदिन्दुसमानषडाननया
सरसीरुहचारुविलोचनया ।
निरुपाधिकया निजवालतया
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ३ ॥
</verse>
<verse>गिरिजासुत सायकभिन्नगिरे
सुरसिन्धुतनूज सुवर्णरुचे ।
शिखितोकशिखावलवाहन हे
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ४ ॥
</verse>
<verse>जय विप्रजनप्रिय वीर नमो
जय भक्तजनप्रिय भद्र नमो ।
जय शाख विशाख कुमार नमः
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ५ ॥
</verse>
<verse>परितो भव मे पुरतो भव मे
पथि मे भगवन् भव रक्ष गतिम् ।
वितराशु जयं विजयं परितः
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ६ ॥
</verse>
<verse>इति कुक्कुट केतुमनुस्मरतां
पठतामपि षण्मुखषट्कमिदम् ।
भजतामपि नन्दनमिन्दुभृतो
न भयंकक्वचिदस्ति शरीरभृताम् ॥ ७ ॥
</verse>
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<ignore>॥ श्रीसुब्रह्मण्यस्तोत्राणि ॥
<title>१. ॥ अथ श्रीसुब्रह्मण्यषट्कम् ॥
<verse>शरणागतमातुरमाधिजि
करुणाकर कामद कामहतम् ।
शरकाननसम्भव चारुरुचे
परिपालय तारकमारक माम् ॥ १ ॥
<verse>हरसारसमुद्भव हैमवती-
करपल्लवलालित कम्रतनो ।
मुरवैरिविरिञ्चिमुदम्बुनिधे
परिपालय तारकमारक माम् ॥ २ ॥
<verse>शरदिन्दुसमानषडाननया
सरसीरुहचारुविलोचनया ।
निरुपाधिकया निजवालतया
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ३ ॥
<verse>गिरिजासुत सायकभिन्नगिरे
सुरसिन्धुतनूज सुवर्णरुचे ।
शिखितोकशिखावलवाहन हे
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ४ ॥
<verse>जय विप्रजनप्रिय वीर नमो
जय भक्तजनप्रिय भद्र नमो ।
जय शाख विशाख कुमार नमः
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ५ ॥
<verse>परितो भव मे पुरतो भव मे
पथि मे भगवन् भव रक्ष गतिम् ।
वितराशु जयं विजयं परितः
परिपालय तारकमारक माम् ॥ ६ ॥
<verse>इति कुक्कुट
पठतामपि षण्मुखषट्कमिदम् ।
भजतामपि नन्दनमिन्दुभृतो
न भयं
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