Proofing

2026-04-07 03:11:52 by akprasad

This page has been fully proofread once and needs a second look.

<page>
<ignore>
॥ श्रीसुब्रह्मण्यस्तोत्राणि ॥
</ignore>
<title>
१. ॥ अथ श्रीसुब्रह्मण्यषट्कम् ॥
</title>
<verse>
शरणागतमातुरमाधिजि
 
तं
करुणाकर कामद कामहतम् ।

शरकाननसम्भव चारुरुचे
 

परिपालय तारकमारक माम् ॥ १ ॥
 
</verse>
<verse>
हरसारसमुद्भव हैमवती-

करपल्लवलालित कम्रतनो ।
 

मुरवैरिविरिञ्चिमुदम्बुनिधे
 

परिपालय तारकमारक माम् ॥ २ ॥
 
</verse>
<verse>
शरदिन्दुसमानषडाननया
 

सरसीरुहचारुविलोचनया ।
 

निरुपाधिकया निजवालतया
 

परिपालय तारकमारक माम् ॥ ३ ॥
 
</verse>
<verse>
गिरिजासुत सायकभिन्नगिरे
 

सुरसिन्धुतनूज सुवर्णरुचे ।
 

शिखितोकशिखावलवाहन हे
 

परिपालय तारकमारक माम् ॥ ४ ॥
 
</verse>
<verse>
जय विप्रजनप्रिय वीर नमो
 

जय भक्तजनप्रिय भद्र नमो ।
 

जय शाख विशाख कुमार नमः
 

परिपालय तारकमारक माम् ॥ ५ ॥
 
</verse>
<verse>
परितो भव मे पुरतो भव मे
 

पथि मे भगवन् भव रक्ष गतिम् ।
 

वितराशु जयं विजयं परितः
 

परिपालय तारकमारक माम् ॥ ६ ॥
 
</verse>
<verse>
इति कुक्कुट केतुमनुस्मरतां
 

पठतामपि षण्मुखषट्कमिदम् ।
 

भजतामपि नन्दनमिन्दुभृतो
 

न भयं क्वचिदस्ति शरीरभृताम् ॥ ७ ॥
 
</verse>
</page>