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2026-05-10 07:32:17 by akprasad

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श्रीत्यागराजस्तवः
 
५०९</ignore>
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शुद्धम <delete>(ञ्जु) </delete><add>[र्दु] </add>लतालकाहलशङ्खदिव्यवरप्रिय

नृत्तगीतरसज्ञ नित्यसुगन्धिगौरशरीर भो ।

चारुहास सुरादिपूजित पूजनीयपदाम्बुज
 

त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ४ ॥
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सर्पराज विभूषाणाव्यय चित्सभेश सदाशिव
 

नन्दिभृङ्गि गणेश वन्दितसुन्दराङ्घ्रिसरोरुह ।
 

वेदशेखर सर्व सुग्रह नामरूप दयाकर
 

त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ५ ॥
 
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सारमोहमहान्धकारदिवाकराखिलभुक्तिद
 

चैकनायक पादपङ्कजसङ्गिचित्तजनामृत ।
 

पापतूलहुताशना<delete>खि </delete><add>[तु] </add>लकोपवन्मुनिपूजित
 

त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ६ ॥
 
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पङ्कजासनसूत वेदतुरङ्ग मेरुशरासन
 

भानुचन्द्ररथाङ्ग भूरथ शेषशायिशिलीमुख ।

मन्दहासशिलीमुख त्रिपुरा राम्बुधे बेर्बडबानल
 

त्यागराज दायानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ७ ॥
 
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दिव्यरत्नमयासनस्थितमेरुतुल्यमहारथ
 

छत्रचामर बर्हिबर्हसमूह <delete>दी </delete><add>[ दि] </add>व्यशिखामणे ।

नित्य शुद्ध महावृषध्वज निर्विकल्प निरञ्जन
 

त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ८ ॥
 
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सर्वलोकविमोहनास्पद तत्पदार्थ वियत्पते
 

शक्तिविग्रह युक्त्यदीन सुवर्णवर्ण विभूतिमन् ।

पापकेतुदिवाकराक्ष परात्परामितकीर्तिमन्
 

त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ९॥
 
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तात मत्कृतपापवारण दक्षयज्ञभयङ्कर
 

दारुकावनतापसाधिपसुन्दरीजनमोहक ।

व्याघ्रपादपतञ्जलिस्तुतिसान्द्रसादृशशैलज
 

त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ १० ॥
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॥ इति श्रीत्यागराजस्तवः सम्पूर्णः ॥
 
५०९
 
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