Stotrarnava /555
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<ignore>श्रीत्यागराजस्तवः
५०९</ignore>
<verse>शुद्धम <delete>(ञ्जु) </delete><add>[६र्दु] </add>लतालकाहलशङ्खदिव्यवरप्रिय
नृत्तगीतरसज्ञ नित्यसुगन्धिगौरशरीर भो ।
चारुहास सुरादिपूजित पूजनीयपदाम्बुज
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ४ ॥
</verse>
<verse>सर्पराज विभूषाणाव्यय चित्सभेश सदाशिव
नन्दिभृङ्गि गणेश वन्दितसुन्दराङ्घ्रिसरोरुह ।
वेदशेखर सर्व सुग्रह नामरूप दयाकर
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ५ ॥
</verse>
<verse>सारमोहमहान्धकारदिवाकराखिलभुक्तिद
चैकनायक पादपङ्कजसङ्गिचित्तजनामृत ।
पापतूलहुताशना<delete>खि </delete><add>[तु] </add>लकोपवन्मुनिपूजित
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ६ ॥
</verse>
<verse>पङ्कजासनसूत वेदतुरङ्ग मेरुशरासन
भानुचन्द्ररथाङ्ग भूरथ शेषशायिशिलीमुख ।
मन्दहासशिलीमुख त्रिपुरा राम्बुधे बेर्बडबानल
त्यागराज दायानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ७ ॥
</verse>
<verse>दिव्यरत्नमयासनस्थितमेरुतुल्यमहारथ
छत्रचामर बर्हिबर्हसमूह <delete>दी </delete><add>[ दि] </add>व्यशिखामणे ।
नित्य शुद्ध महावृषध्वज निर्विकल्प निरञ्जन
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ८ ॥
</verse>
<verse>सर्वलोकविमोहनास्पद तत्पदार्थ वियत्पते
शक्तिविग्रह युक्त्यदीन सुवर्णवर्ण विभूतिमन् ।
पापकेतुदिवाकराक्ष परात्परामितकीर्तिमन्
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ९॥
</verse>
<verse>तात मत्कृतपापवारण दक्षयज्ञभयङ्कर
दारुकावनतापसाधिपसुन्दरीजनमोहक ।
व्याघ्रपादपतञ्जलिस्तुतिसान्द्रसादृशशैलज
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ १० ॥
</verse>
<trailer text="26_END">॥ इति श्रीत्यागराजस्तवः सम्पूर्णः ॥
५०९
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<ignore>श्रीत्यागराजस्तवः
<verse>शुद्धम
नृत्तगीतरसज्ञ नित्यसुगन्धिगौरशरीर भो ।
चारुहास सुरादिपूजित पूजनीयपदाम्बुज
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ४ ॥
<verse>सर्पराज विभूषाणाव्यय चित्सभेश सदाशिव
नन्दिभृङ्गि
वेदशेखर सर्व
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ५ ॥
<verse>सारमोहमहान्धकारदिवाकराखिलभुक्तिद
चैकनायक पादपङ्कजसङ्गिचित्तजनामृत ।
पापतूलहुताशना<delete>खि
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ६ ॥
<verse>पङ्कजासनसूत वेदतुरङ्ग मेरुशरासन
भानुचन्द्ररथाङ्ग भूरथ शेषशायिशिलीमुख ।
मन्दहासशिलीमुख त्रिपुरा
त्यागराज दायानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ७ ॥
<verse>दिव्यरत्नमयासनस्थितमेरुतुल्यमहारथ
छत्रचामर बर्हिबर्हसमूह <delete>दी
नित्य शुद्ध महावृषध्वज निर्विकल्प निरञ्जन
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ८ ॥
<verse>सर्वलोकविमोहनास्पद तत्पदार्थ वियत्पते
शक्तिविग्रह युक्त्यदीन सुवर्णवर्ण विभूतिमन् ।
पापकेतुदिवाकराक्ष परात्परामितकीर्तिमन्
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ ९॥
<verse>तात मत्कृतपापवारण दक्षयज्ञभयङ्कर
दारुकावनतापसाधिपसुन्दरीजनमोहक ।
व्याघ्रपादपतञ्जलिस्तुतिसान्द्रसादृशशैलज
त्यागराज दयानिधे कमलापुरीश्वर पाहि माम् ॥ १० ॥
<trailer text="26_END">॥ इति श्रीत्यागराजस्तवः सम्पूर्णः ॥
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