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श्रीहरिहरस्तोत्ररत्नमाला
 
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गङ्गाधरान्धकरिपो हर नीलकण्ठ
 

वैकुण्ठ कैटभरिपो कमठाब्जपणे ।

भूतेश खण्डपरशो मृड चण्डिकेश
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ २॥
 
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विष्णो नृसिंह मधुसूदन चक्रपाणे
 

गौरीपते गिरिश शङ्कर चन्द्रचूड ।
 

नारायणासुरनिबर्हण शार्ङ्गपाणे
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ ३॥
 
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मृत्युञ्जयोग्र विषमेक्षण कामशत्रो
 

श्रीकान्त पीतवसनाम्बुधिनील शौरे ।
 

ईशान कृत्तिवसन त्रिदशैकनाथ
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ ४॥
 
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लक्ष्मीपते मधुरिपो पुरुषोत्तमाद्य
 

श्रीकण्ठ दिग्वसन शान्त पिनाकपाणे ।
 

आनन्द रङ्गधरणीधर पद्मनाभ
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ ५ ॥
 
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सर्वेश्वर त्रिपुरसूदन देवदेव
 

ब्रह्मण्यदेव गरुडध्वज शङ्खपाणे ।
 

त्र्यक्षोरगाभरण बालमृगाङ्कमौले
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ ६॥
 
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श्रीराम राघव रमेश्वर रावणारे
 

भूतेश मन्मथरिपो प्रमथाधिनाथ ।
 

चाणूरमर्दन हृषीकपते मुरारे
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ ७ ॥
 
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शूलिन् गिरीश रजनीशकलावतंस
 

कंसप्रणाशन सनातन केशिनाश ।
 

भर्ग त्रिणेत्र भव भूतपते पुरारे
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ ८॥
 
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गोपीपते यदुपते वसुदेवसूनो
 

कर्पूरगौर वृषभध्वज फालनेत्र ।
 

गोवर्धनोद्धरण धर्मधुरीण गोप
 

त्याज्या भटा य इति सन्ततमामनन्ति ॥ ९ ॥
 
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