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श्रीगणेशस्तोत्रेषु
 
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मेदुरं मौक्तिकासारं वर्षन्तौ <ref>1</ref>भक्तिशालिनाम् ।

वसुधाराशङ्खनिधी वाक्पुष्पाञ्जलिभिः स्तुमः ॥ २४ ॥
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वर्षन्तौ रत्नवर्षेण '<ref>2</ref>वलद्बालातपत्विपौषौ
 

वरदौ नमतां वन्दे वसुधापद्मशेवधी ॥ २५ ॥
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शमिताधिमहाव्याधीः सान्द्रानन्दकरम्बिता:ताः

ब्राह्म्यादी :दीः कलये शक्तीः शक्तीनामभिवृद्धये ॥ २६ ॥
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मामवन्तु महेन्द्राद्या दिक्पाला दर्पशालिनः ।
'

<ref>3</ref>
संनुमः श्रीगणाधीशं <ref>4</ref>सवाहायुधशक्तयः ॥ २७ ॥
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नवीनपल्लवच्छायादायादवपुरुज्ज्वलम् ।
 

मेदस्वि मदनिष्यन्दस्रोतस्वि कटकोटरम् ॥ २८ ॥
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<verse>य
जमानतनुं यागरूपिणं यज्ञपूरुषम् ।
 

यमं यमवतामर्थ्च्यं यत्नभाजामदुर्लभम् ॥ २९॥
 
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स्वारस्यपरमानन्दस्वरूपं स्वयमुद्गतम् ।
 

स्वयं वेद्यं स्वयं शक्तं "<ref>5</ref>स्वयं कृत्यत्रयाकरम् ॥ ३० ॥
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<verse>
हारकेयूरमकुटकटकाङ्गदकुण्डलैः ।
 

अलङ्कृतं च विघ्न्नानां हर्तारं देवमाश्रये ॥ ३१ ॥
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इति '<ref>6</ref>मन्त्रावलिस्तोत्रं कथितं तव सुन्दरि ।

समस्तमीप्सितं तेन सम्पादय शिवे<ref>7</ref> शिवम् ॥ ३२ ॥
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॥ इति श्रीगणपतिमन्त्राक्षरावलिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
 
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<footnote text="3_START">
३. ॥ श्रीगणेशाष्टकम् ॥
 
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गिरिस्वामिकन्यावराङ्गे वसन्तं
 

सुरस्वामिनं केलिरूपं हसन्तम्
 

लघुस्थूलविघ्नं विनिघ्नन्तमाद्यं
 

सदानन्दरूपं गणेशं भजेऽहम् ॥ १ ॥
 
5. स्वयकृत्यत्त्रयी
 
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<footnote>
1. भक्त
 
</footnote>
<footnote>
2.
 
बलं बाला
 
</footnote>
<footnote>
3.
 
संनमन्तः
 
</footnote>
<footnote>
4. सहस्रायुध-
 
</footnote>
<footnote>5. स्वयकृत्यत्त्रयी</footnote>
<footnote>
6.
 
7.
 
मन्त्राक्षर-
 
</footnote>
<footnote>7.
शिवं
 
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