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श्रीगणपतिमन्त्राक्षरावलिः
 
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ष्ठवर्णवाच्यस्य दारिद्र्यस्य विभञ्जकैः ।

एतैरेकादशकरानलङ्कुर्वाणमुन्मदम् ॥ ११ ॥
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परानन्दमयं भक्तप्रत्यूहव्यूहनाशनम् ।

परमार्थप्रबोधाधिब्धिं पश्यामि गणनायकम् ॥ १२ ॥
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तत्पुरःप्रस्फुरद्विबिल्वमूलपीठ समाश्रयौ ।

रमारमेशौ विमृशाम्यशेषशुभदायकौ ॥ १३ ॥
 
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येन दक्षिणभागस्थन्यग्रोधतलमाश्रितम् ।
 

साकल्पं सायुधं वन्दे तं साम्बं परमेश्वरम् ॥ १४ ॥
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वरसम्भोगरुचिरौ'<ref>1</ref> पश्चिमे पिप्पलाश्रयौ ।

रमणीयतरौ वन्दे रतिपुष्पशिलीमुखौ ॥ १५ ॥
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रममाणौ गणेशानोत्तरदिक्फलिनीतले ।

भूभूधरावुदाराभौ भजे भुवनपालकौ ॥ १६ ॥
 
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वलमानवपुर्ज्योतिःकडारितककुप्तटीः ।
 

हृदयादिरगं देवि '<ref>2</ref>रङ्गरक्षाकृते भजे ॥ १७ ॥
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रदकाण्डरुचिज्योत्स्ना"<ref>3</ref>काशगण्डस्रवन्मदम् ।

ऋद्ध्याश्लेषकृतामोदमामोदं देवमाश्रये ॥ १८ ॥
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दलत्कपोलविगलन्मदधाराबलाहकम् ।

समृद्धितटिदाश्लिष्टं प्रमोदं हृदि भावये ॥ १९॥
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सकान्तिं कान्तिलतिका परिरब्धतनुं भजे ।

भुजप्रकाण्ड' <ref>4</ref>सच्छायं सुमुखं कल्पपादपम् ॥ २० ॥
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वन्दे तुन्दिल '<ref>5</ref>मिन्धानं चन्द्रकन्दलशीतलम् ।

दुर्मुखं मदनावत्या निर्मितालिङ्गनामृतम् ॥ २१ ॥
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जम्भवैरिकृताभ्यर्च्यौ जगदभ्युदयप्रदौ ।
 

अहं मदद्रवौ विन्घ्नाहतये "<ref>6</ref>तेजसां श्रये ॥ २२ ॥
 
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<verse><ref>7</ref>
नवशृङ्गाररुचिरौ नमत्सर्व सुरासुरौ ।
 

द्राविणीविघ्नकर्तारौ द्रावयेतां दरिद्रताम् ॥ २३ ॥
 
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<footnote>
1. रसिकौ
 
5.
 
सन्धां च
 
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<footnote>
2.
 
देवमङ्ग
 
6.
 
रेफसां
 
</footnote>
<footnote>
3.
 
शार
 
7.
 
सम
 
</footnote>
<footnote>
4.
 
संच्छायि
 
</footnote>
<footnote>5. सन्धां च</footnote>
<footnote>6. रेफसां</footnote>
<footnote>7. सम</footnote>
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