Stotrarnava /34
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32
पृष्ठम्
पङ्क्तिः
84
21
विलोचनाभ्यां
27
"
86
8
90
14
92
5
मृगारुढ
अत्रष्टयोऽष्ट
"
7
दुश्चिन्तदुर्व्यसनधातु
"
8
बन्दे
"
11
सर्वोऽपिमन्त्र
शुद्धाशुद्धसूची
अशुद्धः
धुनुधरा
शैलाथिनाथम्
विलोचनाभ्यां
धनुर्धरौ
शैलाधिनाथम्
मृगारूढ
अष्टत्रयाष्ट
दुश्चित्तदुर्व्यसनदाम
सर्वोपमन्त्र
शुद्धः
वन्दे
"
17
बहिरन्तरवित्कटाय
वहिरन्तर दिक्तटाग्र
"
18
क्ष्माभागर्जित
क्ष्माभागगर्जित
93
29
95
24
महादेव
महादेवं
मृयुंजयाय
मृत्युञ्जयाय
103
14
स्वस्त्रियः
स्वस्त्रियः
"
29
104
16
पशुपतिं
त्यगाधिराजाय
पशुपतिं
त्यागाधिराजाय
"
18
"
105
11
नगगी
"
नगरी
107
24
पतञ्चलि
पतञ्जलि
110
7
सनिविष्टं
सन्निविष्टं
111
17
जगद्गुरूं
जगद्गुरुं
"
"
112
25
29
2
"
"
"
"
"
"
8
नुदा
114
भवनी
"
मुदा
भवानी
116
26
प्रापितं
यापितं
124
1
वजितं
वर्जित
"
22
22
मान्
माम
23
"
स्मने
स्वप्ने
127
12
मात्
22
"
दन्नं (?)
माम्
छन्नं
128
4
तोय मुन्निकाय
دو
शोभिते
तोयमुनिकाय
शोभिने
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विलोचनाभ्यां
27
"
86
8
90
14
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मृगारुढ
अत्रष्टयोऽष्ट
"
7
दुश्चिन्तदुर्व्यसनधातु
"
8
बन्दे
"
11
सर्वोऽपिमन्त्र
शुद्धाशुद्धसूची
अशुद्धः
धुनुधरा
शैलाथिनाथम्
विलोचनाभ्यां
धनुर्धरौ
शैलाधिनाथम्
मृगारूढ
अष्टत्रयाष्ट
दुश्चित्तदुर्व्यसनदाम
सर्वोपमन्त्र
शुद्धः
वन्दे
"
17
बहिरन्तरवित्कटाय
वहिरन्तर दिक्तटाग्र
"
18
क्ष्माभागर्जित
क्ष्माभागगर्जित
93
29
95
24
महादेव
महादेवं
मृयुंजयाय
मृत्युञ्जयाय
103
14
स्वस्त्रियः
स्वस्त्रियः
"
29
104
16
पशुपतिं
त्यगाधिराजाय
पशुपतिं
त्यागाधिराजाय
"
18
"
105
11
नगगी
"
नगरी
107
24
पतञ्चलि
पतञ्जलि
110
7
सनिविष्टं
सन्निविष्टं
111
17
जगद्गुरूं
जगद्गुरुं
"
"
112
25
29
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"
"
"
"
"
"
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नुदा
114
भवनी
"
मुदा
भवानी
116
26
प्रापितं
यापितं
124
1
वजितं
वर्जित
"
22
22
मान्
माम
23
"
स्मने
स्वप्ने
127
12
मात्
22
"
दन्नं (?)
माम्
छन्नं
128
4
तोय मुन्निकाय
دو
शोभिते
तोयमुनिकाय
शोभिने