Stotrarnava /295
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<ignore>श्रीराघवाष्टकम्
२४९</ignore>
<verse>वारिजातपारिजातसूनशोभिकन्धरं
हारिहारशोभमानबाहुमध्यसुन्दरम् ।
कामदेव<add>[देह]</add>कान्तिपूरसोदराङ्गवैभवं
राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ ८ ॥
</verse>
<verse>भोगिराजभोगपीनबाहुदण्डमण्डितं
राजराजसोदरास्यपद्मशीतदीधितम् ।
वालिस सू<error> </error>नुशोकदानधीरधीरविक्रमं
राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ ९ ॥
</verse>
<verse>नारदादियोगिबृन्दवन्द्यपादपङ्कजं
वारिदावलीनिकाशकायकान्तिसुन्दरम् ।
शारदारविन्द<error>रविन्द </error>पत्ररम्यदीर्घलोचनं
राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ १० ॥
</verse>
<verse>पापितापजातभेदकारणं गुणान्वितं
रामदिव्यनामयुक्तवृत्तपञ्चकद्वयम् ।
भुक्तिमुक्तिदानबद्धचित्तवृत्तिमन्वहं
वक्त
वक्ति यः शृणोति सोऽपि वाञ्छितं समीहते ॥ ११ ॥
</verse>
<trailer text="END">॥ इति श्रीरामरत्नदशकं सम्पूर्णम् ॥
</trailer>
<title text="START">८. ॥ अथ श्रीराघवाष्टकम् ॥
</title>
<verse>कमललोचनौ काञ्चनाम्बरौ
कवचभूषणौ कार्मुकान्वितौ ।
कलुषसंहरौ कामितप्रदौ
रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ १ ॥
</verse>
<verse>धृतशिखण्डिनौ दीनरक्षकौ
धृति हिमाचलौ दिव्यविग्रहौ ।
दिविजपूजितौ दीर्घदोर्युगौ
रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ २ ॥
</verse>
<verse>पवनजानुगौ पादचारिणौ
पटुशिलीमुखौ पावनाङ्घ्रिकौ ।
परमसात्त्विककौ भक्तवत्सलौ
रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ ३ ॥
२४९
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<ignore>श्रीराघवाष्टकम्
<verse>वारिजातपारिजातसूनशोभिकन्धरं
हारिहारशोभमानबाहुमध्यसुन्दरम् ।
कामदेव<add>[देह]</add>कान्तिपूरसोदराङ्गवैभवं
राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ ८ ॥
<verse>भोगिराजभोगपीनबाहुदण्डमण्डितं
राजराजसोदरास्यपद्मशीतदीधितम् ।
वालि
राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ ९ ॥
<verse>नारदादियोगिबृन्दवन्द्यपादपङ्कजं
वारिदावलीनिकाशकायकान्तिसुन्दरम् ।
शारदारविन्द<error>रविन्द
राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ १० ॥
<verse>पापितापजातभेदकारणं गुणान्वितं
रामदिव्यनामयुक्तवृत्तपञ्चकद्वयम् ।
भुक्तिमुक्तिदानबद्धचित्तवृत्तिमन्वहं
वक्त
वक्ति यः शृणोति सोऽपि वाञ्छितं समीहते ॥ ११ ॥
<trailer text="END">॥ इति श्रीरामरत्नदशकं सम्पूर्णम् ॥
<title text="START">८. ॥ अथ श्रीराघवाष्टकम् ॥
<verse>कमललोचनौ काञ्चनाम्बरौ
कवचभूषणौ कार्मुकान्वितौ ।
कलुषसंहरौ कामितप्रदौ
रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ १ ॥
<verse>धृतशिखण्डिनौ दीनरक्षकौ
धृति
दिविजपूजितौ दीर्घदोर्युगौ
रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ २ ॥
<verse>पवनजानुगौ पादचारिणौ
पटुशिलीमुखौ पावनाङ्घ्रिकौ ।
परमसात्त्वि
रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ ३ ॥
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