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श्रीराघवाष्टकम्
 
२४९</ignore>
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वारिजातपारिजातसूनशोभिकन्धरं

हारिहारशोभमानबाहुमध्यसुन्दरम् ।

कामदेव<add>[देह]</add>कान्तिपूरसोदराङ्गवैभवं
 

राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ ८ ॥
 
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भोगिराजभोगपीनबाहुदण्डमण्डितं

राजराजसोदरास्यपद्मशीतदीधितम् ।
 

वालिसू<error> </error>नुशोकदानधीरधीरविक्रमं
 

राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ ९ ॥
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नारदादियोगिबृन्दवन्द्यपादपङ्कजं
 

वारिदावलीनिकाशकायकान्तिसुन्दरम् ।

शारदारविन्द<error>रविन्द </error>पत्ररम्यदीर्घलोचनं
 

राम राम राम रामनाम जल्प तारकम् ॥ १० ॥
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पापितापजातभेदकारणं गुणान्वितं
 

रामदिव्यनामयुक्तवृत्तपञ्चकद्वयम् ।

भुक्तिमुक्तिदानबद्धचित्तवृत्तिमन्वहं
 
वक्त

वक्ति
यः शृणोति सोऽपि वाञ्छितं समीहते ॥ ११ ॥
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॥ इति श्रीरामरत्नदशकं सम्पूर्णम् ॥
 
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८. ॥ अथ श्रीराघवाष्टकम् ॥
 
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कमललोचनौ काञ्चनाम्बरौ
 

कवचभूषणौ कार्मुकान्वितौ ।

कलुषसंहरौ कामितप्रदौ
 

रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ १ ॥
 
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धृतशिखण्डिनौ दीनरक्षकौ
 

धृति हिमाचलौ दिव्यविग्रहौ ।

दिविजपूजितौ दीर्घदोर्युगौ
 

रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ २ ॥
 
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पवनजानुगौ पादचारिणौ
 

पटुशिलीमुखौ पावनाङ्घ्रिकौ ।
 

परमसात्त्विकौ भक्तवत्सलौ
 

रहसि नौमि तौ रामलक्ष्मणौ ॥ ३ ॥
 
२४९
 
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