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१६४
 
श्रीविष्णुस्तोत्रेषु
 
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नीलवर्णार्णवशय श्रीवल्लभ जगत्पते ।

त्रय्यन्तगीतासङ्ख्येयसन्मङ्गलगुणाकर ॥ १३ ॥
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रमारमण राजीवदलचारुविलोचन ।

नित्ययौवनसौन्दर्यशील दिव्यगुणार्णव ॥ १४ ॥
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वेदवेद्य विशालाक्ष विश्वंभर धरापते ।
 

दाशार्ह देवदेवेश दामोदर दयानिधे ॥। १५ ॥
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धरणीधारकाधारनिलयाधोक्षजाव्यय ।
 

योगिध्येय जगद्वन्द्य जगत्स्वामिन् जनार्दन ॥ १६ ॥
 
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नारसिंह हयग्रीव हरे प्रह्लादवत्सल ।
 

लोकाधार पराधार आत्माधार धराधर ॥ १७ ॥
 
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रथाङ्गपाणे सर्वेश सर्वलोकसमाश्रय ।

भूतभव्यभवन्नाथ वेङ्कट ( टाचलनायक ॥ १८ ॥
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कृष्ण विष्णो विशालाक्ष वैजयन्तीविराजित ।

क्षीरार्णवशयानन्त शरण्याश्रितवत्सल ॥ १९
 
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सर्वात्मन् सर्वलोकेश सर्व सर्वात्मनायक ।

करुणाकर कालज्ञ सर्वलोकनियामक ॥ २० ॥
 
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मुञ्जीकेश हृषीकेश केशिमर्दन केशव ।
 

नरकान्तक काकुत्स्थ कालात्मन् कालपाचक ॥ २१ ॥
 
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करीन्द्रवरदानन्द श्रीधर श्रीनिकेतन ।
 

निरवद्य परब्रह्मन् सर्वलोकपदाश्रय ॥ २२ ॥
 
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नाथसेव्यपदाम्भोज वकुलाभरणाश्रय ।
 

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रामारामाभिरामाङ्ग रामकृष्णेति कीर्तये ॥ २३ ॥
 
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श्रीमद्वेङ्कटनाथमादिपुरुषं पूर्णं परं शाश्वतं
 

श्रीनाथं शरणागतार्तिहरणं नारायणं संश्रये ।

कृष्णं विष्णुमनन्तमच्युतमजं गोविन्दमिन्दीवर-
 

श्यामं नन्दकशङ्खचक्ररुचिरं ध्यायन् भजे कीर्तये ॥ २४ ॥
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येनैतत्पठ्यते नाम्नामष्टाविंशोत्तरं शतम् ।

अनिष्टपक्षक्षपणमिष्टावाप्तिरवाप्यते ॥ २५ ॥
 
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॥ इति श्रीनाममौक्तिकमाला सम्पूर्णा ॥
 
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1. रामायाः आरामः श्रीनिवासः
 
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