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1.
 
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<ignore>
श्रीकालहस्तीश्वराष्टकम्
 
११७</ignore>
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क्षालितप्रभक्तकर्मजातरोगकर्दमं

क्षालिकासनाथमिन्द्रशैलराजकर्दमम् ।

ज्वालितात्म रोष भीषकेलिदक्षनिर्दमं
 

कालहस्तिनायकं सुखप्रदायकं भजे ॥ ८ ॥
 
</verse>
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॥ इति श्रीकालहस्तीश्वराष्टकं सम्पूर्णम् ॥
 
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४१. ॥ अथ श्रीकालहस्तीश्वराष्टकम् ॥
 
</title>
<verse>
गङ्गाधराय गरुडध्वजसंनुताय

माङ्गल्यदाय महितोरगभूषणाय ।

सङ्गीतलोलहृदयाय सदाशिवाय
 

श्रीकालहस्तिनिलयाय नमः शिवाय ॥ १ ॥
 
</verse>
<verse>
कन्दर्पदर्पदहनाय कृपाकराय
 
'भन्दारसुन्दरसुरद्रुवरप्रदाय ।
 

<ref>1</ref>
मन्दारसुन्दरसुरद्रुवरप्रदाय ।
मन्दार
जप्रसवमञ्जुलमस्तकाय
 

श्रीकालहस्तिनिलयाय नमः शिवाय ॥ २ ॥
 
</verse>
<verse>
डिण्डीरडुण्डुभरपाण्डुरविग्रहाय
 
'

<ref>2</ref>
चण्डासुरप्रहरणाय विशारदाय ।

कुण्डल्यधीश<delete>समुदार्चित</delete><add>[समुदञ्चित ] </add>कुण्डलाय

श्रीकालहस्तिनिलयाय नमः शिवाय ॥ ३॥
 
</verse>
<verse>
हालाहलग्रहणलालसमानसाय
 

नीलाम्बु<delete>जाय निज </delete><add>[ जातनिभ ] </add>संनुतकन्धराय ।

एलाधिपत्रिपुरराक्षससंह राय
 
राय
श्रीकालहस्तिनिलयाय नमः शिवाय ॥ ४ ॥
 
</verse>
<verse>
लक्ष्मीभवाय<add>[तनूभव ] हराय </add>हराय <add>[शिवा ] </add>युताय

दक्षाध्वराय विकलोत्कट वैभवाय ।

वक्षोविलम्बिसुमनोहर मौक्तिकाय
 

श्रीकालहस्तिनिलयाय नमः शिवाय ॥ ५ ॥
 
</verse>
<footnote>1.
[मन्दारसान्द्रसुरवन्द्यवरप्रदाय ]
 
</footnote>
<footnote>
2. [ चण्डाशिरप्रकरणाय
 
११७
 
</footnote>
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