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११४
 
श्रीशिवस्तोत्रेषु
 
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शरच्चन्द्रहासं सुकर्पूरभासं
 

भजे पार्वतीशं महाताण्डवेशम् ॥ १२ ॥
 
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स्फुरन्मुद्रिकारत्नराजत्कराङ्घ्रि

रणत्स्वर्णकोटीरर।राद्भुजौघम् ।

लसन्मध्यसम्बद्धपट्टाभिरामं
 

भजे पार्वतीशं महाताण्डवेशम् ॥ १३ ॥
 
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स्फुरन्तं नदन्तं महान्तं दिगन्तं
 

वसन्तं महाश्चर्यवासो नितान्तम् ।
 

अनन्तं भवान्तं भवनीहृदन्तं
 

भजे पार्वतीशं महाताण्डवेशम् ॥ १४ ॥
 
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महादेव देवादिदेवेश शम्भो
 

भवन्तं विना देवमन्यं न जाने ।
 

क्षणाराधनेनाशुतोषं महेशं
 

भजे पार्वतीशं महाताण्डवेशम् ॥ १५ ॥
 
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नमस्ते नमस्ते शिवानन्दकीर्ते
 

नमस्ते नमस्ते भवानन्दमूर्ते ।
 

नमस्ते नमस्ते शरण्यैकमूर्ते
 

नमस्ते नमस्ताण्डवाडम्बराय ॥ १६ ॥
 
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नमस्ते नमस्ते जगज्जन्मकर्त्रे
 

नमस्ते नमस्ते नमः फालनेत्र ।
 

नमस्ते नमस्ते हराया<delete></delete><add>[घ]</add>हर्त्रे
 

नमस्ते नमस्ताण्डवा डम्बराय ॥ १७ ॥
 
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नमः पार्वतीप्राणनाथाय तुभ्यं
 

नमः सर्वलोकैकनाथाय तुभ्यम् ।
 

नमो विष्णुहृत्पद्मकोशाय तुभ्यं
 

नमस्ते नमस्ताण्डव डम्बराय ॥ १८ ॥
 
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नमो दिव्यकैलासवासाय तुभ्यं
 

नमो दिव्यरत्नाहिभूषाय तुभ्यम् ।
 

नमः सर्वयज्ञोपवीताय तुभ्यं
 

नमस्ते नमस्ते नमः शङ्कराय ॥ १९ ॥
 
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