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श्री बाणाष्टकम्
 
९९</ignore>
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श्रीपञ्चाक्षरमन्त्रमष्टशतसङ्ख्याकस्तवं सर्वदा
 

ये शृण्वन्ति पठन्ति पावनजनास्तेषां तु रोगौषधम् ।

वेदान्तोद्भवचिद्विशिष्ट' <ref>1</ref>वचसामप्यूहतां दुर्लभं
 

विन्दन्तीन्दुकलाधरं च सुतरां सायुज्यमुक्तिं मुदा ॥ ५५ ॥
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॥ इति श्रीनमश्शिवायरगडा सम्पूर्णा ॥
 
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२७. ॥ अथ श्रीबाणाष्टकम् ॥
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श्रीमत्कपर्दितटिनीतटशोभनाय
 

शीतांशुरेखपरिकल्पित शेखराय ।

नित्याय निर्मलगुणाय निरञ्जनाय
 

नीहारहारधवलाय नमः शिवाय ॥। १॥
 
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डिण्डीरपिण्डपरिपाण्डुरविग्रहाय
 

दीव्यज्जटापटलमण्डितमस्तकाय ।
 

नागेन्द्र कृत्तिवासनाय निरामयाय
 

नारायणप्रियतमाय नमः शिवाय ॥ २ ॥
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दर्वीकराकलितकुण्डल<delete>मध्यमानं </delete><add>[ मण्डमण्ड्यमान ]
</add>
गण्डाय चण्डसुरशात्रवदण्डनाय ।

आखण्डलादिसुरमण्डल<delete>मध्यमान </delete><add>[ वन्द्यमान ]
</add>
पादाम्बुजाय वरदाय नमः शिवाय ॥ ३॥
 
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कालान्तकाय कमलासन पूजिताय

कल्याणशैलपरिकल्पितकार्मुकाय ।

कन्दर्पदर्पदहनाथ कलाधराय
 

कारुण्यपुण्यनयनाय नमः शिवाय ॥ ४॥
 
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विश्वेश्वराय बृषभोत्तमवाहनाय
 

विध्वस्तदक्ष<delete>विहरा</delete><add>[विहिता ] </add>ध्वरविभ्रमाय ।
 

गङ्गाधराय गजदानवमर्दनाय
 

दोर्दण्डदण्डविभवाय नमः शिवाय ॥ ५ ॥
 
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सोमानलार्क परिकल्पितलोचनाय
 

सोमार्कवह्निमुनिपुङ्गव सेविताय ।
 

भूतेश्वराय भुवनत्रयनाय काय
 

भूत्यङ्गरागशुभदाय नमः शिवाय ॥ ६ ॥
 
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1. मनसामप्यूह्यतां
 
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