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श्रीशिवस्तोत्रेषु
 
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कामादिवर्गविपिनप्रलयाग्निमन्त्
रं
दुर्दोषशैलकुलिशाधिकभीममन्त्रम् ।

मायान्धकारपरि<delete>शोषित </delete><add>[ शोषण ] </add>भानुमन्त्रं

वन्दे षडक्षरसदाशिवनाममन्त्रम् ॥ ४ ॥
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अत्रष्ट योऽ</error><fix>अष्टत्रया</fix>ष्टपुरवायुविकारकोश-

क्लेशाष्टपाशबहुदुःखविनाशमन्त्रम् । <add>(?)
</add>
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दुश्चिन्तदुर्व्यसनधातु</error><fix>दुश्चित्तदुर्व्यसनदाम</fix>विभेदमन्त्रं <add>(?)
 
</add>
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बन्दे</error><fix>वन्दे</fix> षडक्षरसदाशिवनाममन्त्रम् ॥ ५ ॥
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ञ्चप्रसादमहिताक्षरबीजमन्त्रं
 

मन्त्राग्रगण्यभुवनस्तुतमन्त्रराजम् ।
 

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सर्वोऽपि मन्त्र</error><fix>सर्वोपमन्त्र</fix>जनक प्रणवात्ममन्त्रं
 

वन्दे <add>(?)</add> षडक्षरसदाशिवनाममन्त्रम् ॥ ६ ॥
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ओंकार बिन्दुसहिताधिकशक्तिबीजं
 

पञ्चाक्षरत्रितयवर्णकमेकवर्णम् ।

एकादशाक्षरसमन्वितहंसमन्त्रं
 

वन्दे षडक्षरसदाशिवनाममन्त्रम् ॥ ७ ॥
 
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श्रीसज्जनात्मबहिरन्तर<error> वित्कटा
 
ग्र</error><fix>दिक्तटाग्र</fix>
क्ष्माभाग<fix>ग</fix>र्जितनिरन्तर घोषमन्त्रम् ।
 

षट्चक्रमण्डप विहारविशुद्धमन्त्रं
 

वन्दे षडक्षरसदाशिवनाममन्त्रम् ॥ ८ ॥
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षड्वर्णमन्त्राष्टकमद्भुतार्
थं
सर्वागमप्रोक्तजगत्प्रकाशम् ।
 

यः संपठेन्मुक्तिसमस्तभोगान्
 

प्राप्नोति सत्यं सति सिद्धमन्त्रम् ॥ ९ ॥
 
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॥ इति श्रीषडर्णमन्त्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥
 
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<title text="24_START">
२४. ॥ अथ श्रीनमश्शिवाष्टकम् ॥
 
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संसारदावानलशामकाय
 

मृत्युंजयायामितविक्रमाय ।
 

सुरासुरौघार्चितपादुकाय
 

शिवासमेताय नमः शिवाय ॥ १ ॥
 
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