Stotrarnava /119
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<ignore>श्रीशिवपञ्चचामरस्तोत्रम्
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<verse>चतुर्गुणद्विरष्टकप्रकारचित्रकेलये
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ३॥
</verse>
<verse>शरन्निशाकरप्रकाशमन्दहासमञ्जुला-
धरप्रवालभासमानवक्त्रमण्डलश्रिये ।
करस्फुरत्कपालमुक्तविष्णुरक्तपायिने
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ४ ॥
</verse>
<verse>सहस्रपुण्डरीकपूजनैकशून्यदर्शना-
सहस्वनेत्रकल्पितार्चनाच्युताय भक्तितः ।
सहस्रभानुमण्डलप्रकाशचक्रदायिने
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ५ ॥
</verse>
<verse>सहस्रहल्लवीरभद्रसिंहनादगर्जिता
श्रुतिप्रभेददक्षयागभो <ellipsis>... र</ellipsis> स्मना ।
<ellipsis>...</ellipsis>
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥३ ॥
६ ॥</verse>
<verse>रसारथाय रम्यपत्रभृद्रथाङ्गपाणये
धराधरेन्द्रचापशिञ्जिनीकृतानिलाशिने ।
सुसारथीकृतानुजानु वेदरूपवादिने
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ७ ॥
</verse>
<verse>मृकण्डुसूनुरक्षणावधूतदण्डपाणये
सुखण्डमण्डलस्फुरत्प्रभा जितामृतांशवे ।
अखण्डभोगसम्पदर्थ लोकभावितात्मने
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ८ ॥
</verse>
<verse>मधुरिपुविधुशक्र मुख्य देवै-
रपि नियमार्चितपादपङ्कजाय ।
कनकगिरिशरासनाय तुभ्यं
रजतसभापतये नमः शिवाय ॥ ९ ॥
</verse>
<trailer>॥ इति श्रीशिवपञ्चचामरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
७३
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<ignore>श्रीशिवपञ्चचामरस्तोत्रम्
<verse>चतुर्गुणद्विरष्टकप्रकारचित्रकेलये
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ३॥
<verse>शरन्निशाकरप्रकाशमन्दहासमञ्जुला-
धरप्रवालभासमानवक्त्रमण्डलश्रिये ।
करस्फुरत्कपालमुक्तविष्णुरक्तपायिने
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ४ ॥
<verse>सहस्रपुण्डरीकपूजनैकशून्यदर्शना-
सहस्वनेत्रकल्पितार्चनाच्युताय भक्तितः ।
सहस्रभानुमण्डलप्रकाशचक्रदायिने
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ५ ॥
<verse>सहस्रहल्लवीरभद्रसिंहनादगर्जिता
श्रुतिप्रभेददक्षयागभो <ellipsis>...
<ellipsis>...</ellipsis>
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥
<verse>रसारथाय रम्यपत्रभृद्रथाङ्गपाणये
धराधरेन्द्रचापशिञ्जिनीकृतानिलाशिने ।
सुसारथीकृतानुजानु वेदरूपवादिने
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ७ ॥
<verse>मृकण्डुसूनुरक्षणावधूतदण्डपाणये
सुखण्डमण्डलस्फुरत्प्रभा
अखण्डभोगसम्पदर्थ
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ८ ॥
<verse>मधुरिपुविधुशक्र
रपि नियमार्चितपादपङ्कजाय ।
कनकगिरिशरासनाय तुभ्यं
रजतसभापतये नमः शिवाय ॥ ९ ॥
<trailer>॥ इति श्रीशिवपञ्चचामरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
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