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श्रीशिवपञ्चचामरस्तोत्रम्
 
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चतुर्गुणद्विरष्टकप्रकारचित्रकेलये
 

सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ३॥
 
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शरन्निशाकरप्रकाशमन्दहासमञ्जुला-
 

धरप्रवालभासमानवक्त्रमण्डलश्रिये ।

करस्फुरत्कपालमुक्तविष्णुरक्तपायिने
 

सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ४ ॥
 
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सहस्रपुण्डरीकपूजनैकशून्यदर्शना-
 

सहस्वनेत्रकल्पितार्चनाच्युताय भक्तितः ।

सहस्रभानुमण्डलप्रकाशचक्रदायिने
 

सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ५ ॥
 
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सहस्रहल्लवीरभद्रसिंहनादगर्जिता
 

श्रुतिप्रभेददक्षयागभो <ellipsis>...</ellipsis> स्मना ।
 

<ellipsis>...</ellipsis>
सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ३ ॥
 
६ ॥</verse>
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रसारथाय रम्यपत्रभृद्रथाङ्गपाणये
 

धराधरेन्द्रचापशिञ्जिनीकृतानिलाशिने ।
 

सुसारथीकृतानुजानु वेदरूपवादिने
 

सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ७ ॥
 
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मृकण्डुसूनुरक्षणावधूतदण्डपाणये
 

सुखण्डमण्डलस्फुरत्प्रभा जितामृतांशवे ।
 

अखण्डभोगसम्पदर्थ लोकभावितात्मने
 

सदा नमः शिवाय ते सदाशिवाय शम्भवे ॥ ८ ॥
 
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मधुरिपुविधुशक्र मुख्य देवै-
 

रपि नियमार्चितपादपङ्कजाय ।
 

कनकगिरिशरासनाय तुभ्यं
 

रजतसभापतये नमः शिवाय ॥ ९ ॥
 
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॥ इति श्रीशिवपञ्चचामरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
 
७३
 
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