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मन्त्राणामकारादिवर्णक्रमकोश ।
 
१५
 
मन्त्रप्र०
 
पड॑स्य वि॒ष्ठाः श॒तम॒क्षण॑ २३
षोडशी स्तोम ओजो
 
स.
 
सईधानो वसुंष्कृवि
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ०
 
ST.
 
समि॑द्धो अ॒द्य मनु॑षो दुरो
 
२९
 
२५
 
स॒हस्र॑शीषी॒ पुरु॑षः सह
 
३१
 
'
 
५८
 
स॒मिधानि॑ दे॒वस्यत
 

 

 
स॒हस्र॑णि सहस्रशो
 
१६
 
५३
 
१५
 
३ समिधानं दुवस्यत
 
१२
 
३०
 
स॒ह॒तानि॑ विश्वरूप्यूर्जा ३
 
२२
 
स॒मु॒द्रं ग॑च्छ॒ स्वाहा॒न्तरि॑क्षं
 

 
२१
 
स॒ह॒तो वि॒श्वसा॑मा
 
१८
 
३९
 
१५
 
३६
 
स इषु॑हस्त॒ः स नि॑ष॒ङ्ग
 
१७
 
३५
 
स॒मु॒द्रस्य॒ त्वाव॑क॒याग्ने॒
समु॒द्रादूर्मर्मधु॑म॒ाँ २॥ उ
 
१७
 

 
संक्रन्द॑नेनाऽनिमि॒षेण॑
 
१७
 
३४
 
१७ ८९
 
सं च॒द्ध्यस्वा॑ग्ने॒ प्रच॑
 
२७ २
 
सखा॑य॒ः संवः॑ स॒म्यते॒
 
१५
 
२९
 
स॒मु॒द्राय॑ त्वा॒ वार्ताय
 
३८
 

 
सं॒ज्ञान॑मसि काम॒धर॑ण॒
 
१२ ४६
 
जो गर्भो अ
 
११
 
स॒जूरब्दो अय॑वोभिः
 
१२
 
७४ स॒मु॒द्रे ते॒ हृद॑यम॒प्स्व॒न्तः
 
स॒तुभिः॑ स॒र्व॒धा
 
१४
 
७ । स॒मु॒द्रे ते॒ हृद॑यम॒प्स्वन्तः
 

 
४३ समुदाय॑ शिशुमारानाले २४ २१
 
सं ते॒ मन॒ मन॑सा॒ सं प्राणः
 
सं ते॑ वा॒युमा॑त॒रिश्वा॑
 
सं ते॒ पय॑सि॒ सम॑
 
१२
 
११३
 
२० १९
 

 
१८
 
२५
 
११
 
३९
 
स॒ज॑र्दे॒वेन॑ सवि॒त्रा य॒ज्
 

 
१० । समुद्रे त्वा॑ नृ॒मणा॑ अ॒प्सु
 
१२
 
२०
 
सं त्वम॑ग्ने॒ सूर्य॑स्य॒ वर्च॑सा
 

 
१९
 
स॒जोषा॑ इन्द्र॒ सग॑णो म॒रुद्भिः ७
 
३७ । समुद्रोऽसि॒ नभ॑स्वाना॒ार्द्र
 
१८
 
४५
 
सं॒धये॑ जा॒रं गृ॒हायो॑पप॒ति
 
३०
 

 
स॒त्यं च॑ मे श्र॒द्धाच॑ मे॒
 
१८
 
५ स॒मुद्रोऽसि वि॒श्वव्य॑चा
 

 
३३
 
संप्रच्यवध्व॒मुप॑ सं॒प्रया॒ता
 
१५
 
५३
 
स॒त्रस्य॒ ऋद्भि॑र॒स्यगन्म॒
 
स त्वं नेश्चिन वज्रहस्त
 

 
५२
 
स॒म्यक्त्र॑वन्ति स॒रितो न
 
१३
 
३८
 
संब॒र्हिर॑ङ्काह॒विषा॑
 

 
२२
 
२७
 
३८
 
स॒म्यक्त्र॑वन्ति सरितो न
 
१७
 
९४
 
संभूतिं च विनाशं च
 
४०
 
११
 
सत्वं नो॑ अग्ने व॒मोभ॑
सद॑स॒स्पति॒मनु॑तं प्रि॒य
 
स दु॑द्रव॒त्स्वाहुत॒ः
 
२१
 

 
सम्राड॑सि प्र॒तीची दि
 
१५
 
१२
 
सं मां सृजामि॒ पय॑सा
 
१८
 
३५
 
३२
 
१३
 
सदस्य महि॒मान॑म॒
 
२७
 
१५
 
सं वर्च॑सा॒ पय॑सा॒ सं त॒नू
 

 
२४
 
१५ ३४
 
सर॑स्वती॒ योन्य॒ गर्भं
 
१९
 
९४
 
सं वच॑सा॒ पय॑सा॒ सं तनू
 

 
१४
 
स॒द्यो जा॒तो व्य॑मिमीत य॒ज्ञ २९ / ३६
 
सर॑स्वती॒ मन॑सा पेश॒लं
 
१९
 
८३
 
स॒ध॒मादो॑ द्युम्निनीराप॑
 
१० ७
 
सरो॑भ्यो वैव॒रमु॑प॒स्थाव॑
 
३०
 
१६
 
स न॒ इन्द्रा॑य॒ यज्य॑वे॒
स नः पावक दीदि॒वो
 
स नः॑ पि॒तेव॑ सू॒नवेऽग्ने॑
 
२६
 
१७
 
सर्वे निमे॒षा ज॑ज्ञिरे वि॒द्युतः ३२
 

 
वर्च॑सा॒ पय॑सा॒ सं त॒नू
संवत्सरोऽसि परिवत्सरो २७
संव॑साथ स्व॒र्विद
 

 
१६
 
४५
 
११
 
३१
 
१७
 

 
सवि॒ता ते॒ शरीराणि
 
३५
 

 
सं वा॒ मनः॑सि॒ संव्र॒ता १२
 
५८
 

 
२४
 
सवि॒ता ते॒ शरीरेभ्यः
 
३५
 
२ सा॒कं य॑क्ष्म॒ प्रप॑त॒ चार्षेण
 
१२
 
८७
 
स नो बन्धुर्जनता स
 
३२
 
१०
 
सवि॒ता वा॑ स॒वाना॑œ
 

 
३९
 
सा वि॒श्वायुः सा वि॒श्व
 

 

 

 
नौ
 
भुवनस्य पते
 
१८ ४४
 
स॒वि॒ता प्र॑थ॒मेह॑न्न॒ग्नि
 
३९
 

 
सि॒ञ्चन्ति॒ परि॑षिञ्च॒न्त्यु
 
२० २८
 
सन्न॒ सिन्धु॑रवभूथायो
 
"
 
५९ स॒वि॒ता वरु॑ण॒ो दध॒द्य
 
२०
 
७१
 
सिनीवाली सु॑प॒र्दा
 
११
 
५६
 
'सपर्यंगाच्छुक्रम॑काय
 
स॒प्त ऋष॑य॒ प्रति॑हिता
 
४०
 
८ सवि॒तुस्त्वा प्रसव उत्
 
३१
 
सवाल पृथुष्टु
 
३४
 
१०
 
३४
 
५५ । सुवि॒त्रा प्र॑वि॒त्रा सरं
 
१०
 
३०
 
सिन्धरिव प्राध्व॒ने शू
 
१७
 
९५
 
स॒प्त ते॑ अग्ने स॒मिधः॑ः
 
१७
 
७९ । स♛शि॑तं मे॒ ब्रह्म॒ सशितं ११
 
८१
 
सि॒ह्य॑सि॒ स्वाहा॑ सि॒ह्य
 

 
१२
 
स॒प्तास्या॑सन्परि॒वय॒ः
 
३१
 
१५
 
स॒क्षूंशि॑तो र॒श्मिना॒ रथ॒ः
 
२३
 
१४
 
सह्यसि सपत्नसाही
 

 
१०
 
स प्र॑थ॒मो बृह॒स्पति॑ः
 

 
१५
 
सक्षु॑स॒मिद्य॑वसे वृषन्
 
१५
 
३०
 
सीद् त्वं मातुरस्या उप
 
१२
 
१५
 
स बॊध सू॒रिमे॒घवा॒
 
सम॑ख्ये दे॒व्या धि॒या संद
समग्र॒द्मना॑गत सं
 
४ २४
 
३७ १५
 
१२
 
४३
 
स ँसदस्व म॒हाँऽअ॑सि
 
३७
 
सीद॑ होत॒ः स्व उ॑ लोके
 
११ ३५
 
सृ॑ष्टा॒ वसु॑भी रु॒द्वै
 
५५
 
सीरां युञ्जन्ति क॒वयो॑ यु॒गा १२
 
६७
 
स॒स॒वभा॑गा स्ये॒षा
 
सीसैन त मन॑सा
 
१९
 
८०
 

 
१८
 
समवयसनमन्त
 
३४ ३९
 
समा॑स्त्वाम् ऋ॒त व
 
स॒ह मा॑नुं पुरुहूत भि॒यं
 
१८
 
६९
 
सु॒ग॒व्य॑ नो॒ वा॒जी स्वश्वय॑
 
२५
 
४५
 
२७
 

 
समि॑त॒क्षु॑ संक॑ल्पेथ॒ा
 
१२
स॒ह र॒थ्या निव॑त॒स्वाग्ने॒
 
सुगाव देवाः सदना
 
८ १८
 
१०
 
१२
 
५७
 
च॑श्च मे चम॒साश्च॑ मे
 
१८
 
२१
 
समिद॑सि॒ सूर्य॑स्त्वा पुर
समि॑द्ध॒ इन्द्र॑ उ॒षसा॒ मनी॑के २०
 
स॒ह र॒य्या निव॑त॒स्वाग्ने॒
 
१२
 
४१
 

 

 
स॒ह स्माः स॒ह छेन्दस
 
३४ ४९
 
सुजा॑ति॒ ज्योति॑षा स॒ह
 
११
 
४०
 
३६ सह॑स्व मे॒ अरा॑ती॒ः
 
१२
 
९९ । सु॒त्रामा॑णं पृथि॒वीं द्यार्म
 
२१
 

 
समि॑द्धे अ॒ग्नावधि॑ माम १७
समि॑द्धे अ॒ग्निः स॒मिधा २१
समि॑द्धो अ॒ग्निर॑श्विना / २०
समि॑द्धो अ॒ञ्जन्कृद॑रं
 
५५
 
स ह॑व्य॒वाडम॑र्त्य उ॒शिग्
 
२२
 
१६ सुनाव॒मारु॑य॒ मन॑वन्ती
 
२१
 
१२
 
सह॑श्च सह॒स्य॒श्च॒ हैमं
 
१४ २७
 
सु॒प॒णं व॑स्ते मृ॒गो अ॑स्या॒दन्तो २९
 
४८
 
५५
 
सह॑सा जा॒तान्प्रणुदा नः
 
१५
 

 
सुप॒र्णे पर्जन्य आ॒तिर्वा॑ह॒सो २४
 
३४
 
२९
 

 
सहस्र प्र॒मास॑ स॒हस्र॑
 
१५
 
६५
 
सुप॒र्णोऽसि म॒रुत्मा॑न्
 
१७ ७२