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मन्त्राणामकारादिवर्णक्रमकोशः ।
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
मैतु॑ वाजी कर्निक्रद॒त्
 
११ ४६
 
भूर॑सि॒ भूमि॑र॒स्यर्दति
 
१३ १८
 
म॒हो अर्ण॒ः सर॑स्वती
 
प्रेषेभिः प्रेषानाप्नोति
 
१९ १९
 
भूर्भुवः स्वः तत्स॑वि॒तुः
 
३६
 

 
प्रोथ॒दश्वो न यव॑से
 
१५ ६२
 
भूर्भुवः स्व॒र्द्यौरिव भून्ना
 

 

 
प्रोमा॑ण॒ सोम॒ आग॑तो
 
५६ । भूर्भुवः स्वः सुप्र॒जाः
 

 
३७
 
मन्त्रप्र०
 
मा छन्दः प्रमा॒ छन्दः
 
मा
 
त इन्द्र ते व॒यं रा
 
माता च ते पि॒ता च ते
 
११
 
अ० कं०
 
२० ૧
 
१४ १८
 
१०
 
२२
 
२३
 
२४
 
1
 
भेषजम॑सि भेष॒जं
 
ब.
 
५९
 
मा॒ता च॑ ते पि॒ता च ते
 
२३ २५
 
बदसूर्य श्रव॑सा म॒हाँ २ ॥ अ ३३
 
मातेव॑ पु॒त्रं पृ॑थि॒वी पुरी
 
१२ ६१
 
४०
 
म.
 
म॒हाँ २॥ अ॑सि सूर्य॒ बड ३३
 
२५ ३७
 
३९
 
बर्हिषदः पितर ऊत्युव
 
बलवि॒ज्ञायः स्थवि॑र॒ः प्रवरः १७
 
ब॒ह्वीनां पि॒ता ब॒हुर॑स्य पुत्रः २९
बाहू मे॒ बल॑मि॒न्द्रा॑य॒
 
बीभत्सायै पोल्कसं वर्णीय ३०
बृ॒हनि॑द॒ध्म ए॑षां॒ भूरि॑ ३४
ब्रह॑स्पते॒ अति॒ यद॒र्यो अही २६
बृह॑स्पते॒ परि॑दीया रथे॑न
 
बृह॑स्पते॒ वाज॑ जय॒ बृह॒
 
बृह॑स्पते सवितर्बोध
 
१७
 
१७
 
मखस्य॒ शिरोसि मखार्य
 
३७
 

 
१९
 
५५
 
मा त्वा॑ तपत्य आ॒त्मा
 
२५ ४३
 
मध॑वे॒ स्वाहा॒ माध॑वाय॒
 
२२
 
३१
 
मा नः॒ शर्धूस॒ अर॑रुषो
 

 
३०
 
३७
 
४२
 
मधु नक्तंमुतोषसो
 
१३
 
२८
 
मन॑स्ति॒ तन॑य॒ मा
 
१६
 
१६
 
मधु॑मतीनं॑ इ॒ष॑स्कृ॒धि
 

 

 
२० ७
 
मधु
 
वातां ऋतायते
 
१३
 
मधु॑श्च॒ मात्र॑वश्च॒ वास॑
 
१३
 
mr mr
 
२७
 
मा नो॑ म॒हान्त॑मु॒त मा नौ १६
 
मा नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो अर्य॒मा २५
२६ मापो मौष॑धीहि॑ि स॒र्धानो ६
 
१५
 
२४
 
२२
 
२४
 
मधु॑मानो॒ वन॒स्पति॒
 
१३
 
२९
 
मा मे॒र्मा वि॑क् ऊर्जे
 
१ २३
 

 
मध्वा॑ य॒ज्ञं न॑क्षसे प्रीणा॒नो २७
 
१३
 
मार्मा वि॑क् ऊर्जे
 

 
३५
 
३६
 
मन॑स्त॒ आप्या॑यतां॒ वाक्त
 

 
१५
 
९ ११
 
मनो॑ ज॒तिर्जुषतामाज्य॑स्य
 

 
१३
 
माम हि सीजनता
 
मारिषखनि॒ता
 
२१ १०२
 
१२ ९५
 
२७ ८
 
बोध मे
 
अस्य
 
वर्चसो
 
मन॑स॒ः काम॒मति॑
 
३९
 

 
मासु भ॑त्था मा सुरि॒षो ११
 
६८
 
१२ ४२
 
ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं प॑वते॒ तेज॑
 
: ब्रह्म॑ जज्ञानं प्र॑थ॒मं पु॒र
 
ब्रह्म॑णस्पते॒ त्वम॒स्य य॒न्ता
 
मनो॒ न येषु हव॑नेषु
 

 
१७ माहि भूर्मा पृदा॑कुर्नम॑स्त
 

 
१२
 
१९
 

 
मनो॒ न्वामहे नारा
 

 
५३
 
माहि भूर्माः
 

 
२३
 
१३
 

 
मनो॑ मे तर्पयत॒ वाच॑ मे
 

 
३१
 
मि॒त्रश्च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे॒
 
१८
 
१७
 
३४ ५८
 
ब्रह्मणे ब्राह्मणं क्ष॒त्राय॑
 
म॒न्यवे॑ऽयस्ता॒प॑ क्रोधः॑य॒
 
३०
 
१४
 
मि॒ित्रस्य॑ मा॒ चक्षु॑षेक्षध्व
 

 
३४
 
३०. ५
 
ब्रह्म॒ सूर्य॑समं॒ ज्योति॒ः
 
मयि॑ गृह्णाम्यमे॑ अ॒ग्नि
 
१३
 

 
मि॒त्रस्य॑ चर्षणी॒धृतो वो
 
११
 
६२
 
२३ ४८
 
ब्रह्मणि मे म॒तय॒ शर्धू
 
३३ ७८
 
ब्राह्मणम॒द्य वि॑िदेयं
 
मा॑य॒ त्यदि॑न्द्रि॒य॑ बृ॒हत्
मयीदमिन्द्रं इन्द्रि॒यं
 
३८
 
२७
 
मि॒त्रधि॑हु॒वे पू॒तद॑शं॒ वरु॑णं ३३
 
५७
 
२ १०
 
७ ४६
 
ब्राह्मणोऽस्य॒ मुखमासीत् ३१
 
११
 
म॒युः प्रजाप॒त्य उ॒लो ह॒लि २४
म॒रुता॑स्व॒न्धा विश्वे॑षां
 
३१
 
मि॒त्रः स॒ध॑सृज्य॑ पृथि॒वी
मित्रावरुणाभ्यां त्वा देवा
 
११ ५३
 

 
२३
 
२५
 
६ मित्रो न एहि सुत्रध
 

 
२७
 
भ.
 
मरु॑ति॒ यस्य॒ हि क्ष
 

 
३१
 
मि॒त्रो नवक्षरेण त्रि॒वृत
 

 
३३
 
भर्ग भगवाँ २ ॥
एव
 
अस्तु ३४
 
३८
 
म॒रुत्व॑न्तं वृष॒भं वा॑ वृधानं
 

 
३६
 
मदु॑ष्टम् शिव॑तम शि॒िवो १६
 
५१
 
२१
 
१५
 
३९
 
भग॒ प्रणे॑त॒र्भग॒ सत्य॑राधो ३४
 
भ॒द्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा २५
 
भ॒द्रा उ॒त प्रशस्तयो
 
भ॒द्रो नौ अ॒ग्निराहु॑तो
 
भ॒द्रो ऽसि॒ प्रय॑वस्व
 
३६ । म॒रुत्व २॥ इन्द्र वृष॒भो रर्णाय७
 
मर्म॑णि ते॒ मर्म॑णा छाद
म॒शकान्केशैरिन्द्र॒♛स्वप॑सा २५
 
१५ ३८ म॒हाँ२॥इन्द्रो॑ नृ॒व॒दाच॑र्षणि॒प्रा
 
३८
 
मुख॒सद॑स्य॒ शिर॒
 
१९
 
८८
 
१७
 
४९
 
म॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्या॒
 
१२
 
९०
 

 
मू॒र्धान॑ दि॒वो अ॑र॒तं पृ॑थि॒
 
७ २४
 

 
३९
 
मू॒र्धान॑ दि॒वो अ॑र॒ति॑
 
३३ ८
 

 
३४ महाँ २ ॥ इन्द्रो य ओजसा
 
भव॑तं नः सम॑नसौ
 

 
भव॑तं नः॒ सम॑नस॒
 
१८ ७१
 
१२
 
६०
 
भायै दार्वाहारं प्र॒भावा॑
 
१५
 
३०
 
अ॒ज्युः सु॑प॒र्णो य॒ज्ञो ग॑न्ध॒
भुवो॑ य॒ज्ञस्य॒ रज॑सश्च
भुवो॑ य॒ज्ञस्य॒ रज॑सश्च
भू॒ताय॑ वा॒ नारा॑तये॒
मूम् आ॒खूनाल॑भते॒
 
१८
 
४२ म॒ही द्यौः पृ॑थि॒वी च॑न
 
४६
 

 
१३
 
१५ । म॒ही द्यौः पृ॑थि॒वी च॑न
 
१३
 
३२
 
य.
 
१५
 
२३ । म॒हीनां पर्योऽसि वर्चोदा
 

 

 
य आ॑त्म॒दा ब॑ल॒दा यस्य॒
 
२५
 
१३
 

 
११
 
म॒हीम॒षु मा॒तर॑♛सुव॒
 
२१
 

 
इन्द्र इन्द्रियं द॒धुः
 
२०
 
७०
 
२४
 
२६ । म॒हो अ॒ग्नेः स॑मिधा॒नस्य॒ ३३
 
१७ । य इ॒मा विश्वा॒ भुव॑नानि
 
१७ १७
 

 
४०
 
मू॒र्ध्वा वय॑ः प्र॒जाप॑तिः
 
१४
 

 
२३
 
३ म॒हाँ २ ॥ इन्द्रो॒ वज्र॑हस्तः षोड॒२६
 
म॒हाना॑न्यो रे॒वत्यो
 
१२ । महिं न्रीणामवस्तु यु॒क्षं ३ ३१
 
मू॒र्धासि॒ राड् ध्रु॒वास
मृगो न भीमः कुंच
 
१४ २१
 
मे॒धः॑ मे॒ वरु॑णो ददातु मेधां ३२
मो इन्द्रा पृत्सु ३
 
बू
३२
 
१०
 
३५