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१०
 
सभाष्यशुक्लयजुर्वेदपरिशिष्टेषु-
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
परमेष्ठी त्वां सादयतु
परमेष्व॒भिर्धीतः प्र॒जा
पर॑स्य॒ अधि॑ सं॒वतोऽव॑राँ
 
१७
 
६४ । पु॒नाति॑ ते परि॒स्रुत॒
 
१९
 

 
प्रति॒ स्पशॊो विसृ॑ज॒
 
१३ ११
 

 
५४ । पु॒रा क्रूरस्य॑ वि॒सृप
 

 
२८
 
प्र॒तीची॒मारो॑ह॒ जग॑ती
 
१० १२
 
११
 
७१ । पुरीष्यासो अ॒नय॑ः पाव॒
 
१२
 
५०
 
प्रत॑र्तं वाजि॒न्नाद्र॑व॒
 
११ १२
 
परि॑ ते दूडभो रथो
 

 
३६ पुरीष्योसि विश्वर्भरा
 
११
 
३२ प्र॒तूर्व॒नेव॑व॒क्राम॒न्नश
 
११ १५
 
परि ते धन्वनो हेति
 
परि त्वा गिर्वणो गिर॑ इ॒मा
 
परि॑ त्वाग्ने॒ पुरं॑ व॒यं
 
परि॒ द्यावा॑पृथि॒वी स॒द्य
 
परि॑ नो रु॒द्रस्य॑ हे॒ति
 
परि॑ माग्ने॒ दुरिताद्वाध॒स्व ४ २८
परि॒ वाज॑पतिः क॒विः
 
परि॒वीर॑सि॒ परि॑ त्वा॒ दैव
 
१६
 
१२
 
पु॒रु॒द॒स्मो विषु॑रूपः
 

 
३० । प्रत्यु॑ष्ट॒ रक्षः प्रत्यु॑ष्टा॒
 

 
२९
 

 
२९ । पुरुम॒मृगश्च॒न्द्रम॑सो गोधा
 
२४
 
३५ । प्रत्यु॑ष्ट॒ रक्षः प्रत्यु॑ष्टा॒
 

 

 
99
 
२६ । पुरु॑ष ए॒वेद सर्व॒ यद्भूतं
 
३१
 

 
प्र॒थ॒मा द्वि॒तीयैर्द्वतीय
 
२०
 
१२
 
३२
 
१२
 
पूर्णा देवं परोपत
 

 
४९
 
प्रथ॒मा वा॑ र॒थिन
 
२९
 

 
१६ ५०
 
पू॒षणि॑ वनि॒ष्टुना॑न्ध॒हीन्स्थू २५
पू॒ष॒न्तव॑ व्र॒ते व॒यं न रिष्ये
 

 
प्र नूनं ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्मंत्रै
 
३४
 
५७
 
३४
 
४१ । न यच्छत्वर्य॒मा प्र पूषा
 

 
२९
 
११
 
२५
 
पू॒षा पञ्चा॑च॒रेण॒ पञ्च
 

 
३२ । प्रपर्व॑तस्य वृष॒भस्य॑
 
१०
 
१९
 

 

 
पृच्छामि॑ि त्वा चि॒तये॑ देव
 
२३
 
४९ प्र प्रि॒यम॒ग्निभि॑र॒तस्य॑
 
१२
 
३४
 
परीतो वि॑िञ्चता सुत
 
१९
 

 
पृच्छामि॑ि त्वा॒ पर॒मन्त॑ पृथि॒ २३
 
६१ । प्रब॒हवो सिसृतं जीवसै
 
२१
 

 
परीत्य॑ भू॒तानि॑ पु॒त्य॑
 
३२
 
११
 
पृथि॒वि देवयज॒न्योष॑ध्या
 

 
२५ प्रम॑न्महे॒ शव॑सा॒नाय॑
 
३४
 
१६
 
परीमे गाम॑ने॒षत॒ पर्य॒
 
पु॒रो दि॒वा प॒र ए॒ना पृ॑
पव॑मान॒ः सो अ॒द्य न॑ः
प॒वित्रे॑ण पुनीहि मा
 
३५
 
१८ । पृथि॒वी च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे
 
१८
 
१८ । प्रमु॑ञ्च॒ धन्व॑न॒स्त्वमु॒भ
 
१६
 

 
१७
 
२९ । पृथि॒वी छन्द॒ोऽन्तरि॑क्षं
 
१४
 
१९
 
प्र याभि॒र्या॑सि॑ दा॒श्वास
 
२७
 
२७
 
१९
 
४२ पृथि॒व्या अ॒हमु॑द॒न्त
 
१७
 
६७
 
१९
 
४०
 
पृथि॒व्याः पुरी॑षम॒स्य
 
२४
 

 
प्र व॒ इन्द्रा॑य बृह॒ते मरु॑तो
 
प्रवा॒युमच्छ बृह॒ती म॑नी॒षा ३३
 
३३
 
९६
 
५५
 
प॒वित्रे॑ स्थो वैष्ण॒व्य
 

 
१२
 
पृथि॒व्याः स॒धस्था॑द॒ग्निं
 
११
 
१६
 
प्रवा॑वृजे सुप्र॒या ब॒र्हिरेषा
 
३३
 
४४
 
प॒वित्रे॑ स्थो वैष्ण॒ष्
 
१० ६
 
पृथि॒व्यै स्वाहा॒न्तरि॑क्षाय॒
 
२२
 
२९
 
प्रवी॑र॒या शुच॑यो दद्रिरे
 
३३
 
७०
 
प॒शुः प॒शूना॑नोति॒
 
१९
 
२०
 
पृश्नििस्तर॒श्चीन॑ पृश्नि
 
२३
 

 
प्र॒वो॑ म॒हे मन्द॑मानाया
 
३३
 
२३
 
पृष्ठवाद च॑ मे पष्ठ॒ही च॑ मे १८
 
२७ । पृष॑दश्वा म॒रुत॒ः पृनि॑मातरः २५
 
२०
 
val महे महि॒ नमो
 
३४
 
१७
 
पृष्ठवाहा॑ वि॒राज॑ उ॒क्षाणॊ
 
२४
 
१३
 
पृष्टी मैं राष्ट्रम॒दम सौ
 
२०
 
८ प्र॒सद्य॒ भस्मि॑ना॒ योनि॑म॒प
 
१२
 
३८
 
पातं नो॑ अश्विना दिव
 
२०
 
६२
 
पृष्टो दि॒वि पृष्टो अग्निः
 
१८
 
७३ । प्रस्त॒रेण॑ परि॒धिना॑
 
१८ ६३
 
पा॒व॒क्रया॒ यश्च॒तय॑न्त्या
 
१७
 
१० प्रघासिनौ हवामहे
 

 
४४ प्रागपा॒गुद॑गध॒राक्स॒र्वत॑स्त्वा ६ ३६
 
पा॒व॒कव॑र्चाः शुक्रव॑र्चां
 
पा॒व॒का न॒ः सर॑स्वती
 
पाहि नो अग्न एकया
 
२०
 
३७
 
पि॒ता नो॑सि॒ पि॒ता नो॑ बोधि ३७
पि॒तुं न स्तो॑षं म॒हो ध
 
४३
 
३४
 
पि॒तृभ्य॑ स्व॒ध॒ायिभ्य॑ः
 
१९
 
पीवोभना रयिवृधः
 
२७
 
पु॒त्रमि॑िव पि॒तरा॑व॒श्विनो॒
 
१२ १०७ । प्र॒जाप॑तये च वा॒यवे॑ च गोमृ २४
८४ । प्र॒जाप॑तये त्वा॒ जुष्टं प्रोक्ष
प्र॒जाप॑तये पु॒रुषन्ह॒स्तिन
२० प्र॒जाप॑तिः संभ्रयमाणः
७ प्र॒जाप॑तिर्वि॒श्वक॑र्मा॒ मनो
३६ प्र॒जाप॑तिश्चरति॒ गर्भे अ॒न्तः ३१
२३ प्र॒जाप॑तिष्ट्वा सादयत्वपां
१० ३४ । प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो १०
 
३०
 
प्रा॒चीन॑ ब॒र्हिः प्र॒दिशः॑ पृ
 
२९
 
२९
 
२२
 

 
प्राचीमनुं प्रदिशं प्रेहि
 
१७
 
६६
 
२४
 
२९ । प्राच्यै दि॒शे स्वाहा॒र्वाच्यै
 
२२
 
२४
 
३९
 
५ प्रा॒ण॒दा अ॑पान॒दा व्या॑न॒
 
१७ १५
 
१८
 
४३
 
प्राणपा अपानपाः
 
२०
 
३४
 
१९ । प्राणश्च मेऽपानश्च॑ मे
 
१८ २
 
१३
 
१७
 
प्राणं मै पापानं मे॑
 
१४
 

 
२०
 
प्रा॒णाय॑ मे वर्चोदा वर्च॑से
 

 
२७
 
पु॒त्रमि॑िव पि॒तरा॑व॒श्विनो॒
 
२०
 
७७ प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो
 
२३
 
६५
 
प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ अपा॒नाय॒
 
२३ १८
 
पुनन्तु॑ मा देवज॒नाः
 
१९
 
३९
 
प्र॒जाप॑ते॒स्तप॑सा वावृधानः
 
२९
 
११
 
प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑पा॒नाय॒
 
२२ २३
 
पु॒नन्तु॑ मा पि॒तर॑ः स॒म्यास॑ः १९ ३७
 
पुन॑र्नः पितरो मनो
 
३ ५५
 
प्र॒जाप॑तौ त्वा दे॒वता॑
प्रतद्विष्णुः स्तवते वीर्येण
 
३५
 
६ प्रातर्‌मं प्रातरिन्द्र॑ह
 
३४ ३४
 

 
२० । प्रात॒र्जितं॒ भग॑मु॒ग्र
 
३४ ३५
 
पुन॑रा॒सद्य सद॑नम॒पश्च॑
 
१२ ३९
 
प्रतद्वा॑चेद॒मृतं॒ नु वि॒द्वा
 
३२
 

 
प्रेता जयंता नर् इन्द्रौ
 
१७ ४६
 
पुन॑रु॒रू॒र्जा निव॑र्त स्व॒
 
१२
 

 
प्रति॑ि क्ष॒त्रे प्रति॑ि तिष्ठामि
 
२०
 
१०
 
प्रेद॑मे॒ ज्योति॑ष्मान्याहि
 
१२ ३२
 
पुन॑रू॒ नव॑र्तस्व॒ पुन॑
 
१२
 
४०
 
प्रति॒पद॑सि प्रति॒पदे॑
 
१५
 

 
प्रेद्ध अने दीदिहि पुरो
 
१७ ७६
 
पुनर्मनः पुनरायु॑र्न आग॒न्
 

 
१५
 
प्रति॒ पन्था॑मपद्महि
 

 
२९
 
प्रैतु॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॒ प्र दे॒व्ये
 
३३
 
८९
 
पुन॑स्त्वा रु॒द्रा वस॑व॒ः समं १२
 
४४
 
प्रति॒श्रुत्वा भर्तनं घोष ३०
 
१९ । प्रैतु॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॒ः प्रदे॒व्ये
 
३७