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मन्त्राणामकारादिवर्णक्रमकोशः ।
 

 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ०
 
कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
द्यौः शान्तिर॒न्तरि॑क्ष॒
 
३६
 
१७
 
द्यौस्ते॑ पृथि॒व्य॒न्तरि॑क्षं
 
२३
 
४३
 
न॒दीभ्य॑ः पौड॒ष्ठमृक्षीकाम्यो ३०
नभ॑श्च॒ नम॒स्यु॒श्च॒ वार्ष
 
८ । नमो॑स्तु स॒र्पेभ्यो॒ ये केच
 
१३
 
१४
 
१५ नम॒ हिर॑ण्यबाहवे
 
१६
 
१७
 
द्यौस्ते॑ पृष्ठं पृ॑थि॒वी स॒ध
 
११
 
२० । नम॑ आ॒शवे॑ चाजि॒राय॑
 
१६
 
३१
 
नमो॑ ह॒स्वाय॑ च वामना
 
१६
 
३०
 
द॒प्सश्व॑स्कन्द पृथि॒वीमनु॒
 
१३
 

 
नम॑ उष्ण॒षणि॑ गिरिच॒
 
१६
 
२२ । न यत्परो नान्त॑र आद्
 
२०
 
८२
 
दु॒नः स॒र्परा॑सु॒तिः प्र॒त्नो
 
११
 
७०
 
नम॑ः प॒र्दने॑ च॒ व्युप्त
 
१६
 
२९ । नरा॒शस॑ः प्रति॒शूरो
 
२०
 
३७
 
ह॒वि॒िदाः पि॑पीषति
 
२६
 
२२
 
नमः कूप्या॑य चाव॒व्याय
 
१६
 
३८ नरा॒शस॑स्य महिमानं
 
२९
 
२७
 
द्वापो॒ अन्ध॑सस्पते॒ दरि॑
 
१६
 
४७
 
नम॑ः कृत्स्नाय॒तया
 
१६
 
२०
 
न॒मय॑ पुंश्च॒ऌ हसा॑य॒
 
३०
 
२०
 
द्रुप॒दादि॑व मुमुचानः
 
२०
 
२०
 
नम॑ः प॒र्णाय॑ च पर्णश॒दाय॑
 
१६
 
४६
 
नवद॒शभि॑रस्तुवत
 
१४
 
३०
 
द्वारो॑ दे॒वीर॒न्व॑स्य॒ विश्वे॑
 
२७
 
१६
 
नम॒ः पार्या॑य चावा॒र्या॑य
 
१६
 
४२
 
न॒वभि॑रस्तुवत पि॒तरो॑
 
१४
 
२९
 
द्विप॑दा॒याश्चतु॑ष्पद॒
 
२३
 
३४
 
नम॑ः श॒गवे॑ च पशु॒पत॑ये
 
१६
 
४० ।
 
वास्तुवत
 
१४
 
३१
 
द्वे विरू
 
चरतः
 
स्वर्थे
 
३३
 

 
नम॑ः श॑भ॒वाय॑ च मयो
 
१६
 
४१
 
न वा उ॑ ए॒तत्रय
 
२३
 
१६
 
द्वे सृती अ॑शृणवं पितॄणां १९
 
धन्व॑ना॒ गा धन्व॑ना॒जं ज॑ये २९
 
ध॒र्ता दि॒वो विभा॑ति॒ त
धा॒ता रा॒तिः स॑वि॒तेदं
धा॒नाः क॑र॒म्भः सक्त॑वः
 
धा॒नाना॑ रू॒पं कुर्व ं
धा॒नाव॑न्तं कर॒म्भिणं
 
१९
 
४४ । नमः श्वभ्यः
 
श्वपतिभ्यः
 
१६
 
२८
 
न वा उ॑ ए॒तन्त्रि॑यसे॒ न
 
२५
 
४४
 
नम॒ः शुष्कया॑य हरि॒त्या
 
१६
 
४५
 
न॒हि तेषा॑म॒मा चि॒न
 

 
३२
 
ध.
 
नम॑ः स॒भाभ्य॑ स॒भा
 
१६
 
२४
 
न॒हि स्पश॒मवि॑दन्न॒न्यम॒
 
३३
 
६०
 
३९ । नमः सिकत्याय च प्रवा
 
१६
 
४३ । नाना॒ हि वा॑ दे॒वहि॑त॒
 
१९
 
३७
 
१६
 
नमः सु ते॑ निर्ऋते तिग्म
 
१२
 
६३
 
नाजा॑ पृथि॒व्याः स॑मिधा॒ाने ११
 
७६
 
८ १७
 
नमः
 
सेना॑भ्यः सेनानि
 
१६
 
२६
 
नाभि॑र्मे चि॒त्तं वि॒ज्ञानं
 
२०
 

 
२१
 
नम॒ः सभ्य च प्रति
 
१६
 
३३
 
नाभ्या॑ आसीद॒न्तरि॑क्षğ
 
३१
 
१३
 
१९ २२
 
नम॑स्त॒ आयु॑धा॒यान
 
१६
 
१४
 
नार्य॑स्ते॒ पत्न्यो॒ो लोम
 
२३
 
३६
 
१९ २९
 
नम॒स्तक्ष॑भ्यो रथकारे
 
१६
 
२७
 
नाशयि॒त्री बलासस्या
 
१२ ९७
 
धान्यम॑सि धनुहि
 

 
२०
 
नम॑स्ते अस्तु वि॒द्युते
 
३६
 
२१ । नि॒ष्क्रम॑णं नि॒षद॑नं वि॒व
 
२५
 
३८
 
धाम॒च्छद॒ग्निरिन्द्रो॑ ब्र॒ह्मा
 
धाम॑ ते॒ विश्वं॒ भुव॑न॒मधि॑
 
धूम्रा ब॒भ्रुर्नीकाशाः पि
 
१८
 
७६
 
नम॑स्ते रुद्र म॒न्यव॑ उ॒तो
 
१६
 
१७
 
९९
 
नम॑स्ते॒ हर॑से शोचिषे॒
 
१७
 
११
 
१ नि॒युत्वा॑न्वाय॒वाग॑हा॒य ँ
 
नि॒वेश॑नः सं॒गम॑नो॒ वसू॑नां १२
 
२७
 
२९
 
६६
 
२४
 
१८
 
नम॑स्ते॒ हर॑से शोचिषे॒
 
३६
 
२० । निष॑साद घृ॒तव॑ति॒ वरु॑णः
 
१०
 
२७
 
धूम्रान्व॑स॒न्तायाल॑भते
 
२४
 
११
 
नम॒ः स्रुत्या॑य च॒ पथ्या॑य
 
१६
 
३७ निष॑साद घृ॒तव॑तो
 
२० २
 
धूर॑सि॒ धूर्व धूर्वन्तं॒
 

 
८ नमो॑ ग॒णेभ्यो॑ ग॒णप॑ति
 
१७
 
२५ । निहोत होतृपर्दने
 
११
 
३६
 
धृष्टि॑र॒स्पा॑ग्ने अ॒ग्निमा॒
 
१७
 
नमो॑ ज्ये॒ष्ठाय॑ च कनि॒ष्ठाय॑
 
१६
 
३२ नील॑ग्रीवाः शिति॒कण्ठा
 
१६
 
५६
 
ध्रुवक्षि॑ितिध॒र्वयो॑निः
 
१४
 
१ । नमो धृष्णवै च प्रमुशाय॑
 
१६
 
३६
 
नील॑ग्रीवाः शिति॒कण्ठः
 
१६
 
५७
 
ध्रुव॒सद॑ त्वा नृ॒षद॑ मन॒ः
 

 

 
भुवास ध॒रुणास्तृता
 
नमो॑ बहु॒शय॑ व्या॒धि
 
१६
 
१८
 
नृत्ताय॑ सूतं गीताय॑ शैलूषं ३०
 

 
१३
 
१६
 
ध्रु॒वाति॑ च॒रुण॒तो ज॑ज्ञे
 
नमो॑ ब॒ल्मने॑ च कव॒चिर्ने १६
 
३५ । नृ॒षदे॒ वेद॑प्सु॒षदे॒वेष॑
 
१७ १२
 
१३ ३४
 
ध्रु॒वाति॑ ध्रुवोयं यज॑मानो॒ो
ध्रु॒वोऽस॑ पृथि॒वीं ह॑ह
 
नमो॑ मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य॒
 
४ ३५
 
प.
 

 
२८
 
नमो रोहि॑ताय स्थ॒पत॑ये
 
१६
 
१९ । पञ्च दिशो दैवी॑र्य॒ज्ञ
 
१७ ५४
 

 
१३
 
नमो॒ो वञ्च॑ते॒ परि॒वञ्च॑ते
 
१६
 
२१ प
 
नद्यः
 
सरस्वती
 
३४
 
११
 
न.
 
नमो वन्या॑य च॒ कक्ष्या॑य
 
१६
 
३४ । प॒ञ्चस्व॒न्तः पुरु॑ष॒ आवि॑
 
२३
 
५२
 
नक्ोषासा॒ सम॑नसा
 
१२
 
नमो॑ वः पि॒तरो॒ रसा॑य॒
 

 
३२ प॒थस्प॑थ॒ः परि॑पति॑ प॒थ
 
३४
 
४२
 
नक्त॒षासा॒ सम॑नसा॒
 
१७
 
७०
 
नमो वात्या॑य च रेष्म्य
 

 
१६
 
३९ । पय॑ पृथि॒व्या॑ य॒
 
भोषधी
 
१८
 
३६
 
नक्ष॑त्रेभ्यः॒ स्वाहा॑ नक्ष
 
२२
 
२८ । नमो॑ विसृजो विध्य॑
 
१६
 
२३ । पय॑सा शु॒क्रम॒मृते॑ ज॒नित्र॒
 
१९
 
८४
 
2m
 
न तद्रक्ष॑सि॒ न पि॑शा॒चा ३४ ५१ । नमो व्रज्या॑य च गोष्ट्यां
 
१६
 
४४ । पय॑सो रूपं यद्य
 
१९
 
२३
 
न तस्य॑ प्रति॒मा भ॑स्ति॒
 
३२
 
३ नमोऽस्तु नीलग्रीवाय
 
१६
 

 
पय॑सो॒ रेत॒ आभृ॑तं॒
 
३८ २८
 
तं वि॑दाथ॒ य इ॒मा
न ते दूरे प॑र॒मा चि॒त्र
 
१०
 
३१ । नमो॑ऽस्तु रु॒द्रेभ्यो॒ ये दि॒वि
 
१६
 
६४
 

 
र॒मस्या॑ः परा॒वतो॑
 
११ ७२
 
३४
 
१९ नमोऽस्तु रु॒द्रेभ्यो॒ ये पृ॑थि॒
 
१६
 
६६
 
परं मृत्यो॒ अनु॒ परे॑हि॒
 
३५
 
"
 
न स्वावाँ अ॒न्यो दिव्यो
 
२७३
 
६ नमो॑ऽस्तु रु॒द्रेभ्यो॒ ये॒न्तरि
 
१६
 
६५ । परमेष्ठी त्वां सादयतु
 
१५ ५८
 
2