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सभाप्यशुक्लयजुर्वेद परिशिष्टेषु -
 
मन्त्रप्र०
 
भावायो भूष शुचिपा
आ॒विर्म॑यो॒ आवि॑त्तो
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 

 

 
इन्द्र॑श्च म॒रुत॑श्च क्र॒यायो
 

 
५५
 
इ॒मा नु कं॒ भुव॑ना सीष
 
२५
 
४६
 
१०
 

 
इन्द्र॑श्च स॒म्राड्वरु॑णश्च
 

 
३७
 
आ वि॒श्वत॑ः प्र॒त्यञ्च॑
 
११
 
२४
 
इन्द्र॑स्य क्रोडोऽर्दित्यै पाज॒स्य॑ २५
 

 
इ॒मा रु॒द्राय॑ त॒वसै कप॒र्दिने १६
इमाम॑गृभ्णन्रश॒नामृतस्य॒
 
४८
 
२२
 

 
आवो देवास ईमहे
 

 
५ । इन्द्र॑स्य रू॒पमृ॑ष॒भो
 
१९
 
९१
 
इमा ते वाजिनमा
 
२९
 
१६
 
आ॒शुः शिशा॑नो वृष॒भो
 
१७
 
३३
 
इन्द्र॑स्य॒ वज्रऽसि मित्रा
 
१०
 
२१
 
इमा उं
 
त्वा पुरूवसो गरौ ३३
 
८१
 
आ॒शुत्रि॒वृद्धान्तः प॑ञ्च
 
१४
 
२३
 

 
इन्द्र॑स्य॒ वज्रेऽसि वाजसा
 

 

 
इ॒माँ ते॑ प॒क्षा जरौ
 
१८
 
५२
 
आश्रवयेति स्तोत्रियः
 
१९
 
२४
 
इन्द्र॑स्य॒ वज्र॑ म॒रुतामनीकं
 
२९
 
५४
 
इय॒त्यम॑ आसीन्म॒खस्य॑
 
३७
 

 
आसन्दी रूप रोजा
 
१९
 
१६
 
इन्द्र॑स्य॒ वृष्ण॒ वरु॑णस्य॒
 
१७
 
४१
 
इय॑द॒स्यायु॑र॒स्यायु॒र्मय॑
 
१० २५
 
नासो अरुणीन
 
१९
 
६३
 

 
इन्द्र॑ः सु॒त्रामा॒ हृद॑ये॒न
 
१९
 
८५
 
इ॒यम॒परि॑ म॒तिस्तस्यै
 
१३ ५८
 
आ ते सिञ्चत॒ श्रिय॒
 
३३
 
२१
 
इन्द्र॑ः सु॒त्रामा॒ स्व॒वाँ २ ॥ अ २०
 
५१
 
आ सु॒ष्वय॑न्ती यज॒ते
 
२९
 
३१
 

 
इन्द्र॑स्य स्यूर॒सीन्द्रस्य॑
 

 
३०
 
इ॒यं वेदः परो॒ अन्त॑ः पृथि॒ २३ ६२
इ॒र॒ज्यन्न॑ग्ने प्रथयस्व
 
१२ १०९
 
आहं पि॒तम्सु॑वि॒दऔँ २ ॥उ
 
च्छन्ति॑ त्वा सो॒म्यासः
 
इड ह्यदि॑ति॒ हि॒ काम्य॒
इड एह्यदि॑ति॒ एहि॒ सर॑
इभिर॒भिरीड्यः सोमो॑
 
१९
 
५६
 
इन्द्र॒स्यज॑स्थ म॒खस्य॑ वो॒
 
३७
 
६. इरावती धेनुमती हि भूत ५
 
१६
 
इ.
 
इन्द्रनी अपादयं पूर्वा
 
३३
 
९३
 
इ॒ह ति॑रि॒ह रेमध्व
 

 
५१
 
३४
 
१८
 
इन्द्रा॑ग्ने॒ अव्य॑थ॒माना
 
१४
 
११
 
इ॒हैवाग्ने॒ अधि॑धारया
 
२७
 

 

 
२७
 
इन्द्रा॑ग्ने॒ आग॑त॒सुतं
 

 
३१
 
३८
 

 
इ॒न्द्रा॒ग्नी मि॒त्रावरु॒णादि॑ति॒ ३३
 
४९
 
इ॒यं ते॑ य॒ज्ञिया॑ त॒नू
इष॒मूर्ज॑म॒हमित आर्द
 

 
१३
 
१२ १०५
 
२१
 
१४ इ॒न्द्रा॒द्भ्योः प॑च॒तिः सर॑स्वत्यै॒ २५
 
५ । इ॒षश्वो॒ोर्जश्च॑ शर॒दावृ॒तू
 
१४ १६
 
१९
 
२९
 
पुरुसनि
 
१२
 
५१
 
इन्द्रा॑य॒ त्वा॒ वसु॑मते रु॒द्भव॑त॒ ६
इन्द्रा॑य त्वा॒ वसु॑मते रु॒द्रव॑ ३८
 
३२
 
इश्वोर्जश्च शादवृत्
 
१४
 
१६
 

 
इ॒षि॒रो वि॒श्वव्य॑च॒ वातो
 
१८
 
४१
 
स्वापदे वयं
 
३४
 
१५
 
इन्द्राहि चित्रभानो
 
२०
 
८७
 
इ॒षे राये र॑मस्व सहसे
 
१३ ३५
 
इड़े रन्ते॒ हव्ये॒ काम्ये
 
इ॒दमा॑प॒ः प्रव॑हताव॒द्यं च॒
इ॒दमु॑त्त॒रात्स्व॒स्तस्य॒ श्रोत्रं
 

 
४३ इन्द्राया॑हि॒ तूतु॑जान
 
२०
 
८९ इ॒षे पि॑न्वस्वोर्जे पिन्वस्व
 
३८
 
१४
 
६ १७
 
इन्द्राया॑हि धि॒येषि॒तो
 
२०
 
८८ । इ॒षे त्वा॒र्जे त्वा॑ वा॒यव॑स्थ
 

 

 
१३
 
५७
 
इन्द्राया॑हि वृत्रह॒पिबासो
 
२६
 

 
इ॒ष्ट अ॒ग्निराहु॑तः पिपर्तु
 
१८
 
५७
 
इ॒दं पि॒तृभ्यो॒ नमो॑स्व॒
 
१९
 
६८
 
इन्द्रा॒येन्दुध॑सर॑स्वती॒
 
२०
 
५७
 
इष्कृ॑ति॒र्नाम॑ वो मातार्थो १२
 
८३
 
इ॒दं मे॒ ब्रह्म॑ च क्ष॒त्रं चोभे
 
३२
 
१६
 
इन्द्रे॒मं प्र॑त॒रां न॑य॒ राजा
 
१७
 
५१ इ॒ष्क॒र्तार॑मध्व॒रस्य॒ प्रच॑
 
१२ ११०
 
इ॒दं विष्णुर्विच॑क्रमे
 

 
१५
 
इन्द्रेह मत्स्यन्ध॑सो॒ विश्वे॑
 
३३
 
२५ । इ॒ष्टो य॒ज्ञो भृगु॑भिराशी
 
१८
 
५६
 
इ॒दं ह॒विः प्र॒जन॑नं मे अस्तु १९
 
४८
 
इन्द्रो॒ विश्व॑स्य राजति
 
३६
 
V
 
ई.
 
इन्दुर्दक्ष॑ः श्ये॒न ऋ॒तावा॒
 
१८
 
५३ । इन्द्रो॑ वृ॒त्रम॑वृणी॒च्छर्ध॑नीति॒ ३३
 
२६
 
ईडितो देवैईरिवार ॥अ
 
इन्द्र आसां ने॒ता बृह॒स्पति॒ः १७
 
४०
 
इन्धा॑नास्त्वा श॒त हिम
 
२०
 
३८
 

 
१८
 
इन्द्र॒ गोम॑न्नि॒हाया॑हि॒ पिबा २६
 

 
इ॒मं जीवेभ्य॑ परि॒धं द
 
१७ ८४
 
३५
 
इ॒न्द्रा॒ध॒ोषस्त्वा॒ वसु॑भिः
 

 
११
 
इ॒मं नौ देव सवितर्य॒ज्ञं
 
१५ ई॒रवा॑न्य॒दृङ् च॑ स॒दृङ्
 
१७ ८१
 
११
 

 
इन्द्रं दुर॑ः कव॒प्यो॒ धाव॑
 
२०
 
४०
 
इ॒मं देवा असन
 
ई॒ड्यश्चासि॒ वन्द्य॑श्च
 
२९ ३
 

 
४०
 

 
इन्द्र॑वायू इ॒मे सु॒ता
 
इन्द्र॑वायू इ॒मे स॒ता उप॒
इ॒न्द्रवायू सु॑सं॒दृश
 
३३
 
इन्द्रं दैवीर्विशो॑ म॒रुतोऽनुं
 
इन्द्र॑ म॒रुत्व इ॒ह पा॑हि॒ सोमं
इन्द्र॒मिद्धरी॑ वह॒तोऽप्र॑ति
इ॒न्द्र॒वायू बृह॒स्पति॑ मि॒त्रामं ३३
 
४५ इ॒मम॑णा॒युं वरु॑णस्य॒ नाभि
७ ८ इ॒मस्तन॒मूर्ज॑स्वन्तं धया
५६ इ॒मं मे॑ वरुण श्रुधी हवं
 
१७ ८६
 
इ॒मं दे॒वा असप॒त्रधि॑
 
इ॒मा॑न्स॒ः सिर्लिकमध्य
 
२९ २१
 
१० १८
 
७ ३५
 
इ॒मं मा हिसीर्द्विपाद
 
ईशा॑नाय॒ पर॑स्वत॒ आले
 
२४
 
२८
 
१३ ४३
 
३५
 
इमं मा हिसीरे कशफं
 
ईशावास्यमिद सर्व
 
४०
 

 
१३
 
४८
 
१३
 
५०
 
उ.
 
१७
 
८७
 
उ॒क्ताः स॑च॒रा एत ऐन्द्रा
 
२४
 
१५
 
२१
 

 
उ॒क्ताः स॑च॒रा एत ऐन्द्रा॒ा
 
२४
 
१७
 
३३
 
८६ इ॒मसा॑ह॒स्रधि॑श॒तधा॑र॒
 
१३ ४९
 
इन्द्रं विश्व अवीवृधन्
 
१२
 
५६ इ॒मा गिर आदि॒त्येभ्यो
 
उ॒क्ताः च॒रा एत शुना
३४ ५४ उ॒क्थेभि॑र्वृत्र॒हन्त॑मा॒ याम॑
 
२४ १९
 
३३ ७६
 
इन्द्रं विश्वा अवीवृधन्
 
१५
 
६१ इ॒मा
 
मै
 
अग्न॒ इष्ट॑का
 
१७
 

 
उ॒क्षा स॑मु॒द्रो अ॑रुणः
 
१७
 
६०
 
इन्द्रं॒ विश्वा॑ अवीवृधन्
 
१७
 
1
 
६३ इ॒मां ते॒ धियं॒ प्रभ॑रे म॒हो
 
३३
 
२९
 
उखां कृ॑णोतु शक्या
 
งง ५७