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मन्त्राणामकारादिवर्णक्रमकोशः ।
 
मन्त्रप्र०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
अश्म च मे मृत्तिका च मे १८
 
अ० कं०
 
मन्त्रप्र०
 
अ० कं०
 
अ॒श्याम॒ तं काम॑ग्ने॒
 
१८
 
१३ । अह॑ः के॒तुना॑ जुपतासु
७४ : अह॑र॒ह॒रप॑याव॑ भर॒न्तो
 
३७
 
२१ आ न॒ इन्द्रो॑ दूरादा
 
ने
 
२०
 
४८
 
११
 
७५
 
आ न॒ इन्द्रो॒ हरि॑भिर्यो
 
२०
 
४९
 
अश्वत्थेव निषदनं
 
१२
 
७० : अहा॑नि॒ शं भ॑वन्तु नः
 
३६
 
११
 
आनं एतु मनः पुनः
 
३ ५४
 
अश्वत्थेव नि॒िषद॑नं
 
३५
 
४ ! अहा॑व्यग्ने ह॒विरास् ते
 
२०
 
७९
 
अश्व॑स्तूप॒रोगो॑मृ॒गस्ते
 
अश्व॑स्य॒ त्वा॒ वृष्ण॑ः श॒
अश्वा॑ति॒गम॑तीर्न उ॒षासौ ३४
 
अ॒वाव॒ती समाव॒त
 
२४
 

 
अह॑रिव भोगैः पर्येति बाहुं २९
 
५१
 

 
३७
 

 

 
अहु॑तमसि हवि॒र्धानं॒
 

 
४० अदे॑ पु॒राव॑ता॒नाल॑भते॒
 
२४
 
१२ ८१
 
आ.
 
आ नसत्या त्रि॒भिरैका
 
आ नो॑ नि॒युद्भः श॒तिन
 
आ नो मित्रावरुणा घुतै
 
२५ आनो॑ य॒ज्ञं दि॑वि॒स्पृश॒
 
आनो यज्ञं भारती तूर्य
 
३४
 
४७
 
२७
 
२८
 
२१
 

 
३३
 
२९
 
३३
 
अ॒श्विन॑कृ॒तस्य ते॒ सर॑
 
२०
 
३५ आकृ॑तिम॒ग्निं प्र॒युज
 
११
 
६६ । आत्राणि॑ स्व॒लीम॑धु
 
१९ ८६
 
अश्विना गोभिरिन्द्रिय
 
२०
 
७३ । आकृ॑त्यै प्र॒युजेऽग्नये॒
 

 

 
आपतये त्वा परिपतये
 

 

 
अश्विना घ॒मं पा॑त॒
 
३८
 
६२
 
आ कृ॒ष्णेन॒ रज॑सा॒ वर्तमानो ३३
 
४३
 
आपये॒ स्वाहा॑ स्वापये
 

 
२०
 
अ॒श्विना॒ तेज॑सा चक्षुः
 
२०
 
८०
 
आ कृष्णेन॒ रज॑सा॒ वर्त
 
३४
 
३१ । आपव॑स्व॒ हिर॑ण्यव॒
 

 
६३
 
अ॒श्विना॒ नमु॑चेः सु॒तÚ
 
२०
 
५९ ! आ॒क्रस्य॑ वाजिन्पृथि॒वी
 
११
 
१९ । आप॑श्चित्पिप्युस्त॒र्यो न
 
३३
 
१८
 
अ॒श्विना॑ पिबा॑ता॒ मधु
 
२०
 
९०
 
आक्र॑न्दय॒ बल॒मोजो न आ २९
 
५६ । आपो॑ अ॒द्यान्व॑चारिषि॒
 
२०
 
२२
 
अ॒श्विना॑ भेष॒जं
 
२०
 
६४
 
आ॒ग॒त्य॑ वा॒ज्यध्वा॑न॒
 
११
 
अ॒श्विना॑ ह॒विर॑न्द्रि॒यं
 
२०
 
६७
 
॥ आग॑न् वि॒श्ववे॑दसं
 
१८ । आपो॑ अ॒स्मान्मा॒तर॑ः शुन्ध
 

 

 

 
३८
 
अश्वि॑भ्यां॒ चक्षु॑र॒मृतं॒
 
१९ ८९
 
आग्ना३॥इ पत्नी॑वन्त्स॒जू
 

 
१०
 
आपो॑ देव॒ प्रति॑गृभ्णीत॒ १२
आपो॑ ह्॒यबृ॑ह॒तीवि॑िश्व॒
 
३५
 
२७
 
२५
 
अ॒श्विभ्यां॑ पच्यस्व॒ सर॑स्वत्यै १०
 
३१ । आग्ने॒यः कृ॒ष्णग्रीवः सार
 
२९
 
५८
 
आपो॒ हि ष्टा म॑यो॒भुव॒स्ता
 
११
 
५०
 
अ॒श्विभ्यां॑ पिन्वस्व॒ सर॑स्वत्यै ३८
 

 
आ॒ग॒य॒णश्च॑ मे वैश्वदे॒व
 
१८
 
२०
 
आपो॒ हि ष्ठा म॑यो॒भुव॒ ३
 
३६
 
१४
 
अ॒श्विभ्यां॑ प्रातःसव॒न
 
१९
 
२६
 
आधा॒ ये अ॒ग्निमि॑न्ध॒ते
 

 
३२
 
आप्या॑यस्य॒ सर्वे॑तु॒ ते
 
१२ ११२
 
अश्वा॑ घृ॒तेन॒ त्मन्य॒ सम॑
 
२९
 
१०
 
आच्या जानु॑ दक्षिण॒तो
 
१९
 
६२
 
आप्यायस्व मदिन्तम
 
१२ ११४
 
अपा॑ढं य॒त्सु॒ पृत॑नास॒ परि॑ ३४
 
२०
 
आ॒च्छच्छन्द॑ः प्र॒च्छच्छन्द॑ः
 
१५
 

 
ब्रह्म॑ह्म॒णो ब्रह्म २२ २२
 
अर्थादास सहमाना
 
१३
 
२६
 
आज॑ङ्घन्ति॒ सान्वे॑षां ज॒घाँ २९
 
५०
 
आम॒न्द्रैरिन्द्र॒ हरि॑भिर्याहि २०
 
५३
 
अ॒ष्टा॒ व्य॑ख्यत्क॒कुभा॑ः पृथि॒ ३४
अस॑ख्याता स॒हस्रणि
 
२४ । आर्जिघ्र कलश॑ म॒ह्या
 

 
४२
 
१६
 
५४
 
असुर्या नार्म ते लोका
 
अस॑वे॒ स्वाहा॒ वस॑वे॒ स्वाहा॑ २२
 
अयमो अस्यादित्यो
 
असु॑न्वन्त॒मय॑जमानमिच्छ १२
 
४०
 
३०
 
आ॒जुह्वा॑न॒ ईड्यो वन्द्य॒श्चा
आ॒जुह्वा॑ना॒ सर॑स्वती
 
आ मा॒ वाज॑स्य स॒वो
 

 
१९
 
२९ २८
 
आमूरंज प्र॒त्यव॑र्तये॒माः
 
२९
 
५७
 
२० ५८
 
आयं गौः पृरक्रमी
 

 

 
२९
 
१४
 
आ॒जुह्वा॑नः सुप्रतीकः
 
१७.
 
७३
 
६२
 
आतं भ॑ज सौश्रव॒से
 
१२
 
२७
 
आ यदि॒षे नृपति॒ तेज॒
 
३३
 
११
 
m'
 

 
आ तत॑ इन्द्रा॒यव॑ः पनन्त ३३
 
आय॑न्तु नः पि॒तर॑ः सोम्या
 
१९
 
५८
 
२८
 
१७
 
१६
 

 
१७
 
अ॒स्मात्त्वमधि॑जा॒तोस
 
३५
 
१६
 
अ॒सौ यस्ताम्रो अ॑रु॒ण
 
अ॒सौ या सेना॑ म॒रुतः
अ॒सौ यो॑व॒सप॑ति॒
अस्क॑न्नम॒द्य दे॒वेभ्य॒
अस्ता॑व्य॒श॒न॒राधि॑ सु॒शेवो॑ १२
 
अ॒स्माक॒मिन्द्र॒ः समृ॑तेषु
 
अ॒स्मिन्म॑ह॒त्य॒र्ण॒वे॒ऽन्तरि॑
 
अ॒स्मे रु॒द्रा म॒हना॒ पर्व॑तासो ३३
 
आ तू न॑ इन्द्र वृत्रहन्नस्मा
२९ आते॑ व॒त्सो मनयमत्
४३ । आत्म मे वर्चोदा वर्चसे
 
२२ आ॒त्मन्नु॒पस्ये॒ न वृर्कस्य
 
१६ ६ आ॒ति॒थ्यरूपं मास॑रं
 
आया॑त॒मुप॑ भूषत॒
 
३३
 

 
१९
 
१४
 
४७ आ॒तिष्ठ॑न्तं॒ परि॒ विश्वे॑ अभू ३३
 
आय॒त्विन्द्रोऽव॑से॒ उप॑ नः
 
२०
 
४७
 
२२
 

 
आति॑ष्ठ वृत्रह॒न्रथं
 
आयासाय
 
प्राया
 
३९
 
११
 
८ ३३
 

 
३३
 
६५
 
आयु॑ पाहि प्राणं में
 
१४
 
१७
 
आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॑ प्रा॒णो
 

 
२१
 
१२ ११५
 

 
२८
 
आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पतां प्राणो १८
 
२९
 
१९
 
९२
 
आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ाधूं
 
२२
 
३३
 
५५
 
आत्मानं॑ ते॒ मन॑सा॒राद॑जा॒ना २९
 
१७
 
आयुष्मान ने ह॒विषा॑ वृ
 
३५ १७
 
५०
 
आ त्वा॑हार्षम॒न्तर॑भूत्
 
१२
 
११ आयुष्यं वर्च॑स्य राय
 
३४
 
५०
 
अ॒स्मे वो॑ अ॒स्त्विन्द्रि॒यं
 

 
२२ । आ॒दि॒त्यं गर्भ॒ पय॑सा॒
 
१३
 
४१
 
आयोष्ट्वा सद॑ने स॒दया॒
 
१५
 
६३
 
अ॒स्य प्र॒वामनु॒द्युत॑छ॒
 
१६ । आ॒दि॒त्यैर्नो भार॑ति॒ वष्टु
 
२९
 

 
आरा॑नि॒ पार्थि॑व॒ रज॑ः
 
३४
 
३२
 

 
अ॒स्याजरा॑सो द॒माम॒रित्र
 
३३
 
१ आध॑त्त पितरो गर्भं
 

 
३३ । आरोद॑सी अपृण॒दास्व॑मे॒ह ३३ ७५
 
अ॒स्येदिन्द्रो॑ वावृ॒धे॒ वृष्ण्यं
 
३.३
 
९७ आन॒ इभिवि॒दथे॑ सु॒ग॒स्ति ३३ ३४
 
३४ । आ व॒चो मध्य॑मरुहद्भुर्
 
१५
 
५१