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श्री वेंकटेशकाव्यकलापे
शितमृदुपदमुद्रे ॥ ३॥ [भजित भव्यमव्यदर दलित दलमृदुल को कनदमद
विन्यासव्यापसव्य करविराजदनित रशरण भक्तगणनिजचरणशरणीकरणाभर
पुणनिरूपणनिर्निद्रमुद्रे ॥ ४ ॥ अडदूर्ध्वतरापरकर शिखरयुगलशेख
समदन कुलबदनविधुमण्डलविलोकन विदीर्णहद मत्ताविभ्रमरदरविदलित
कमलमुकुरुयुगलनिरर्गलविनिर्गत् कान्तिमुद्दे ॥ ५ ॥ श्रीवेङ्कटशिखर सहम
कान्तलीला सरसज्ञतमुनिनिकरसमुदितबहुलत र भयल सदपसार के लिबहुमान्ये
श्रीशैलाभीरचित दिनाधीशविम्वरमाधीशविषयतयोजन्ये ॥ ७ ॥ श्रीशैलास
सम्पन्नपद्मसरउत्पन्नपद्मिनीकन्ये ॥ ८ ॥ पद्मसरोवरचित महापोर
कमुनिधुकामितवदान्ये ॥ ९ ॥ मानवकर्म जलदुर्मलग निर्मूलन
लिजवर्णनिर्जितदुर्वर्णवज स्फटिकसवर्णसलिएसम्पूर्णसुवर्णमुखरी से कत
रन्दविन्दु सन्दोहनिष्यन्दसन्दान्ति मन्दानन्दमिन्दिवृन्दमधुरतरकार
सम्फुलमी मालतीमुपततितिति कुन्दकुरबक रुपक दमनकादि गुरुमसुम्
घुमित सर्वदिङ्मुख सर्वतोमुखमहनीयामन्दमा कन्दाविरलनारिकेलनिरवधिफट
तरुनि करवी थिरमणीयविपुलटोचानविहारिणि ॥ १० ॥ मञ्जुखतरम्
॥ ११ ॥ महनीयतरमणि जिततरणिमकुटमनोहारिणि ॥ १२ ॥
गतिमत्तराळयुवतियुगतिमदापहारिणि ॥ १३ ॥
मन्थ
फलकण्ठयुवा कुण्ट
कव्याहारिणि ॥ १४ ॥ अकुण्ठवैकुण्ठमहाविभूतिनायक ॥ १५ ॥ अ
कोटिब्रह्माण्डनायक ॥ १६ ॥ श्रीवेङ्कटनायक ॥ १७ ॥ श्रीमति पद्मावति
जय विजयीभव ॥ १९ ॥
यां लावण्यनदी वदन्ति कवयः श्रीमाधवाम्भोनिधि
गच्छन्तीं स्ववशंगतांध तरसा जन्तूनयन्तीमपि ।
यस्यामानाने लहस्तचरण शनि भूषाची
रम्भोजान्यमहोज्ज्वलं च सलिलं सा भातुपद्मावती ॥
अम्भोरहवासिनि ॥ १ ॥ अम्भोरुहासनप्रमुखाखिल भूतानुशा सिनि
अनवरतात्मनाथवक्षसिंहासनाच्यासिनि ॥ ३ ॥ अधियाचन
श्री वेंकटेशकाव्यकलापे
शितमृदुपदमुद्रे ॥ ३॥ [भजित भव्यमव्यदर दलित दलमृदुल को कनदमद
विन्यासव्यापसव्य करविराजदनित रशरण भक्तगणनिजचरणशरणीकरणाभर
पुणनिरूपणनिर्निद्रमुद्रे ॥ ४ ॥ अडदूर्ध्वतरापरकर शिखरयुगलशेख
समदन कुलबदनविधुमण्डलविलोकन विदीर्णहद मत्ताविभ्रमरदरविदलित
कमलमुकुरुयुगलनिरर्गलविनिर्गत् कान्तिमुद्दे ॥ ५ ॥ श्रीवेङ्कटशिखर सहम
कान्तलीला सरसज्ञतमुनिनिकरसमुदितबहुलत र भयल सदपसार के लिबहुमान्ये
श्रीशैलाभीरचित दिनाधीशविम्वरमाधीशविषयतयोजन्ये ॥ ७ ॥ श्रीशैलास
सम्पन्नपद्मसरउत्पन्नपद्मिनीकन्ये ॥ ८ ॥ पद्मसरोवरचित महापोर
कमुनिधुकामितवदान्ये ॥ ९ ॥ मानवकर्म जलदुर्मलग निर्मूलन
लिजवर्णनिर्जितदुर्वर्णवज स्फटिकसवर्णसलिएसम्पूर्णसुवर्णमुखरी से कत
रन्दविन्दु सन्दोहनिष्यन्दसन्दान्ति मन्दानन्दमिन्दिवृन्दमधुरतरकार
सम्फुलमी मालतीमुपततितिति कुन्दकुरबक रुपक दमनकादि गुरुमसुम्
घुमित सर्वदिङ्मुख सर्वतोमुखमहनीयामन्दमा कन्दाविरलनारिकेलनिरवधिफट
तरुनि करवी थिरमणीयविपुलटोचानविहारिणि ॥ १० ॥ मञ्जुखतरम्
॥ ११ ॥ महनीयतरमणि जिततरणिमकुटमनोहारिणि ॥ १२ ॥
गतिमत्तराळयुवतियुगतिमदापहारिणि ॥ १३ ॥
मन्थ
फलकण्ठयुवा कुण्ट
कव्याहारिणि ॥ १४ ॥ अकुण्ठवैकुण्ठमहाविभूतिनायक ॥ १५ ॥ अ
कोटिब्रह्माण्डनायक ॥ १६ ॥ श्रीवेङ्कटनायक ॥ १७ ॥ श्रीमति पद्मावति
जय विजयीभव ॥ १९ ॥
यां लावण्यनदी वदन्ति कवयः श्रीमाधवाम्भोनिधि
गच्छन्तीं स्ववशंगतांध तरसा जन्तूनयन्तीमपि ।
यस्यामानाने लहस्तचरण शनि भूषाची
रम्भोजान्यमहोज्ज्वलं च सलिलं सा भातुपद्मावती ॥
अम्भोरहवासिनि ॥ १ ॥ अम्भोरुहासनप्रमुखाखिल भूतानुशा सिनि
अनवरतात्मनाथवक्षसिंहासनाच्यासिनि ॥ ३ ॥ अधियाचन