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श्री वेंकटेशकाव्यकलापे
 
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लक्ष्मीनिवास निरवद्यगुणैकसिन्धो

संसारसागरसमुत्तरणैकसेतो ।

वेदान्तवेद्यनिजवैभव भक्तभोग्य
 

श्री वेंकटाचलपते तव सुप्रभातम् ॥ २८ ॥
 
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थेत्थं वृषाचलपतेरिह सुप्रभातं
 

ये मानवाः प्रतिदिनं पठितुं प्रवृत्ताः ।

तेषां प्रभातसमये स्मृतिरङ्गभाजां
 

प्रज्ञां परार्थसुलभां परमां प्रसूते ॥ २९ ॥
 
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॥ इति श्रीवेंकटेश सुप्रभातम् ॥
 
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