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जय जय भाजन जय जितजन्म-
जरामरण जय जगज्ज्येष्ठ।
 
जय जय जय जय जय जय जय
 
जय जय जय जय जय जय त्रयक्ष ॥ २४ ॥
 
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अथ भक्तिस्तोत्रनाम पञ्चदशं स्तोत्रम्
 
त्रिमलक्षालिनो ग्रन्थाः सन्ति तत्पारगास्तथा ।
 
योगिनः पण्डिताः स्वस्थास्त्वद्भक्ता एव तत्त्वतः ॥१॥
 
मायीयकालनियतिरागाद्याहारतर्पिताः ।
चरन्ति सुखिनो नाथ भक्तिमन्तो जगत्तटे ॥ २ ॥
 
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