Proofing

✦

This page has not been fully proofread.

मा च ते ख्याम
मातृकां वशिनीयुक्तां
माया च शुद्धविद्या च
मायादितस्वरूपं
मिश्रं च कौलमार्ग च
 
मुख चन्द्रः
मूर्छनेत्युच्यते
मूलकन्दं फणाग्रेण
 
मूलाधारस्थितामेव
 
मूलाधारे भ्यश्रमध्ये
 
य एवं वेद
 
यज्ञं च नस्तन्वं च
 
यस्कुमारी मन्द्रयते
 
यदग्नेियः
यदि वेदाः प्रमाणं
 
यन्न दुःखेन
 
य
 
यान्यहानि
 
यावकाब्धौ
 
या एताः पूर्वपक्षा
 
यासान्तरोहरूपा
 
युवा सुवासाः
युष्मदस्मदोः स्त्रीपुं
 
युष्मयुपपदे
ये चिन्तयत्यन्त्यरुण
ये नाम केचिदिह
 
ये शरीराण्यकल्पयन्
 
योऽपां पुष्पं वेद
योप्सु नावं प्रतिष्ठितां
 
अनुक्रमणिका:
 
12
 
37
56 13
 
योऽर्थज्ञ इन् सकलं
यो वैतां ब्रह्मणो
 
28 3 यो ह वा अहोरात्राणां
 
50 9
 
78 14
 
132 15 रक्तस्फटिकं
159 5 रनदीपो भवेद्देहः
 
24 12 रहस्यनामसहस्रं
 
124
 
272 10
 
7 रागस्वरूपपाशाढ्या
 
270 2
 
35 11
 
41 17
 
269 14
 
97 17
 
17
 
7
 
6
 
269
 
92
 
58
 
91
 
9
 
102 10
 
रागों विद्या कला चैव
 
रिटं क्षेमे शुभा
 
रुद्रग्रन्थिं ततो
 
· रुद्रग्रन्थिरयं शक्तेः
 
रूपकहेतुरूपकं
 
र
 
लकारः इन्द्रबीजं
 
लकारः क्षितितत्त्वं
 
ललाटे च गले चैव
 
लोकस्य द्वारमर्चिमत्
 
38 13
 
174 16 वरदाभयहस्तां च
 
174
 
7 वश कान्तौ
122 12 वसन्तो मधुमाधवौ
 
12 10 वह्नयो दश संप्रोक्ताः
37 5 वागर्थाविव
 
वाङ्मातुरुच्यते
 
2
 
113 17
 
114 14 बाचं धेनुमुपासीत
 
90 9
 
90
 
5
 
157 9
 
25
 
3
 
26 10, 49 13
 
व
 
३६५
 
पु.
 
पं.
 
290 4
 
39 12
 
94 2
 
CC-0. Jangamwadi Math Collection. Digitized by eGangotri
 
132 13
 
275
 
6
 
281 3
 
281 4
 
28 13
 
42
 
24 18
 
18 19
 
54 2
 
53 20
 
2
 
7
 
12 18
 
280 1
 
12 9
 
157 15
 
43 12