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रामरक्षास्तोत्रम्
 
जो तरुण अवस्थावाले, रूपवान्, सुकुमार, महाबली,
कमलके समान विशाल नेत्रोंवाले, चीरवस्त्र और कृष्णमृग-
चर्मधारी, फल-मूल आहार करनेवाले, संयमी, तपस्वी,
ब्रह्मचारी, सम्पूर्ण जीवोंको शरण देनेवाले, समस्त
धनुर्धारियों में श्रेष्ठ और राक्षसकुलका नाश करनेवाले हैं,
वे रघुश्रेष्ठ दशरथकुमार राम और लक्ष्मण दोनों भाई
हमारी रक्षा करें ॥ १७-१९ ॥
 
आत्तसज्जधनुषा विपुस्पृशा-
चक्षयायुग निषङ्गसङ्गिनौ
 
रक्षणाय
 
मम
 
रामलक्ष्मणा-
वग्रतः पथि सदैव गच्छताम् ॥२०॥
 
जिन्होंने संधान किया हुआ धनुष ले रक्खा है, जो
 
बाणका स्पर्श कर रहे हैं तथा अक्षय बाणोंसे युक्त तूणीर
लिये हुए हैं, वे राम और लक्ष्मण मेरी रक्षा करनेके लिये
मार्गमें सदा ही मेरे आगे चलें ॥ २० ॥
 
CC-0. Mumukshu Bhawan Varanasi Collection. Digitized by eGangotr