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श्रीललितासहस्रनामावलिः
 
ओं ज्ञानज्ञेयस्वरूपिण्यै नमः ओं पडध्वातीतरूपिण्यै
 
अव्याजकरुणामूर्तये
 
योनिमुद्रायै
 
त्रिखण्डेश्यै
 
अज्ञानध्वान्तदीपिकायै
 
भात्रालगोपविदितायै
सर्वानुल यशासनायै
 
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नमः
 
त्रिगुणा
 
अभ्याये
त्रिकोणगायै
 
अनवायें
अद्भुतचारित्रायै
 
श्रीचक्रराजनिलयायै
श्रीमत्त्रिपुरसुन्दर्ये
श्रीशिवायै
शिवशक्त्यैक्यरूपिण्यै
 
वार्थप्रदायिन्यै
अभ्यासातिशयज्ञातायै ९९० ललिताम्बिकायै १०००
 
॥ इति श्रीललितासहस्रनामावलिः सम्पूर्णा ॥