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ओं उमायै
 
शैलेन्द्र तनयायै
 

गन्धर्व सेवितायै
 
विश्वगर्भायै
 
स्वर्णगर्माये
 
अवरदायै
 
वागधीश्वर्ये
 
ध्यानगम्यायै
 
अपरिच्छेद्यायै
 
श्रीललिता सहस्रनामावलिः
 
ज्ञानदायै
 
ज्ञानविग्रहायै
 
सर्ववेदान्त संवेद्यायै
 
अदृश्यापै
 
दृश्यरहितायै
 
विज्ञाव्ये
वेद्यवर्जितायै
 
योगिन्यै
 
योगदायै
 
नमः ओं योग्यायै
योगानन्दायै
युगन्धरायै
इच्छाशक्तिज्ञानशक्ति-
क्रियाशक्तिस्वरूपिण्यै
 
६४०
 
सत्यानन्दस्वरूपिण्यै
लोपामुद्रा चिंतायै
लीलाक्ऌप्तब्रह्माण्ड मण्डलायै
 
६५०
 
सर्वाधाराये
 
सुप्रतिष्ठायै
सदसद्रपधारिण्यै
अष्टमूत्यै
अजात्र्यै
लोकयालाविधायिन्यै
 
एकाकिन्यै
 
भूमरूपायै
 
निर्देताये
 
द्वैतवर्जितायै
 
अन्नदायै
 
वसुदायै
 
वृद्धायै
 
ब्रह्मात्मैक्यस्वरूपिण्यै
 
वृहत्यै
 
ब्राह्मण्ये
 
ब्राहायै
 
139
 
नमः
 
६७०