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चेदणप्पगा दुविहा। (पंचा. १०९)
 
णिव्विअप्प वि [निर्विकल्प] संदेह रहित, संशय रहित ।
(निय. १२१)
 
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णिव्विदिगिच्छ/णिबिगिच्छवि [निर्विचिकित्सित ] आठ अङ्गों में
एक, निर्विचिकित्सित, घृणा रहित । जो जीव वस्तु के सभी धर्मों
मे ग्लानि नहीं करता, उसे वास्तव में निर्विचिकित्सित अङ्ग वाला
कहा जाता है। (स.२३१)
 
णिब्बियार वि [निर्विकार] विकार रहित, विशुद्ध । (बो.४९)
णिव्विस वि [निर्विष] विष रहित, विषहीन । (भा.१३७) ण पण्णया
णिव्विसा हुंति। (स. ३१७)
 
णिबुदि स्त्री [निर्वृत्ति] मोक्ष, निर्वाण, मुक्ति । (पंचा.१६९,
स.२०४, निय.१३६) -कम्म पुं [काम] मोक्ष का अभिलाषी।
( पंचा. १६९ ) - मग्ग पुं [मार्ग] मुक्तिपथ । णिव्वुदिमग्गो
(निय. १४.१) - सुहन [सुख ] मोक्षसुख । णिव्बुदिसुहमावण्णा ।
( स. १४०)
 
णिव्वेद /णिव्वेय पुं [निर्वेद ] वैराग्य, मुक्ति की इच्छा, मोक्ष की ओर
प्रवृत्ति । णिव्वेयसमावण्णो णाणी कम्मप्फलं वियाणे ।
( स. ३१८) - परम्परा स्त्री [परम्परा] वैराग्य की परिपाटी ।
देवगुरूणं भत्ता, णिव्वेयपरंपरा विचिंतंता । (मो. ८२ )
णिसा स्त्री [निशा] रात्रि, रात। -यर पुं [कर] 1.चन्द्र,
जिणमयगयणे णिसायरमुणिंदो। (भा. १५९) 2. पुं [चर] राक्षस
चोर, तस्कर ।
 
शशि ।
 
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