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( ढ )
 

 
१०. आर्जव -- ऋजुता भगवान् का गुण है । उनके मन वाणी

और क्रिया में एकरूपता रहती है ।
 

 
११. सौहार्द -- भगवान् समस्त प्राणियों के सुहृद हैं । सब का

हित चाहना उनका स्वभाव है ।
 
-
 

 
१२. साम्य –- जाति, गुण, अवस्था, वृत्ति आदि के तारतम्य

की चिन्ता न
कर भगवान् समस्त प्राणियों को

समान रूप से आश्रय प्राश्रय प्रदान करते हैं ।
 

 
१३. कारुण्य -- भगवान् दया के समुद्र हैं । विना किसी प्रयो-

जन के वे दूसरों के दुःखों को दूर करने की

इच्छा रखते हैं ।
 

 
१४. माधुर्य -- मधुरता भगवान् में सदा रहती है। वे सदा

रसरूप हैं ।
 

 
१५. गाम्भीर्य –- भगवान् स्वभाव से गम्भीर हैं ।
 

 
१६. श्रौदार्य -- प्रत्युपकार की कोई इच्छा न रखकर भगवान्

देते हैं। अधिक से अधिक देकर भी कभी तृप्त
 
बैंकक
 
नहीं होते !
 

 
१७. चातुर्य
 
प्रा
-- आश्रितजनों की शंकाओं तथा दोषों के दूर

करने में भगवान् चतुर हैं ।
 

 
१८. स्थैर्य — अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह करने में वे कभी

विचलित नहीं होते। स्थिरता उनमें सदा

रहती है ।
 

 
१९.
 
धैर्य कठिन से कठिन परिस्थिति में भी वे अपनी प्रतिज्ञा

से विचलित नहीं होते ।