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देवी स्तोत्राणि
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर
मानववंदित पादयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
संतानलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
जय कमलासन सद्गतिदायिनि
ज्ञान विकासिनि गानमये
अनुदिनमर्चित कुंकुमधूसर
भूषितवासित वाद्यनुते ।
कनकधारा स्तुति वैभववंदित
शंकर देशिक मान्यपते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
विजयलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि
शोकविनाशिनि रत्नमये
मणिमय भूषित कर्णविभूषण
शान्तिसमावृत हास्यमुखे ।
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि
काम्य फलप्रद हस्तयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम् ॥
धिमि धिमि धिंधिमि धिंधिमि
धिंधिमि दुंदुभिनाद सुपूर्णमये
घुम घुम घुंघुम घुंघुम
घुंघुम शंखनिनाद सुवाद्यनुते ।
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देवी स्तोत्राणि
सकल सुरासुर देव मुनीश्वर
मानववंदित पादयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
संतानलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
जय कमलासन सद्गतिदायिनि
ज्ञान विकासिनि गानमये
अनुदिनमर्चित कुंकुमधूसर
भूषितवासित वाद्यनुते ।
कनकधारा स्तुति वैभववंदित
शंकर देशिक मान्यपते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
विजयलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि
शोकविनाशिनि रत्नमये
मणिमय भूषित कर्णविभूषण
शान्तिसमावृत हास्यमुखे ।
नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि
काम्य फलप्रद हस्तयुते
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
विद्यालक्ष्मि सदा पालय माम् ॥
धिमि धिमि धिंधिमि धिंधिमि
धिंधिमि दुंदुभिनाद सुपूर्णमये
घुम घुम घुंघुम घुंघुम
घुंघुम शंखनिनाद सुवाद्यनुते ।
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