Proofing

This page has not been fully proofread.

94
 
देवी स्तोत्राणि
 
मंगलदायिनि अंबुजवासिनि
देवगणाश्रित पादयुते
 
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
 
धान्यलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
 
जयवर वर्णिनि वैष्णवि भार्गवि
मन्त्रस्वरूपिणि मन्त्रमये
 
सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद
ज्ञानविकासिनि शास्त्रनुते ।
भवभयहारिणि पापविमोचनि
साधुजनाश्रित पादयुते
 
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
 
धैर्यलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
 
जय जय दुर्गति नाशिनि
 
कामिनि सर्वफलप्रद शास्त्रमये
 
रथगज तुरग पदादिसमावृत
परिजनमण्डित लोकनुते ।
हरि-हर - ब्रह्म - सुपूजित सेवित
तापनिवारणि पादयुते
 
जय जय हे मधुसूदन कामिनि
गजलक्ष्मि जय पालय माम् ॥
 
अयि खगवाहिनि मोहिनि चक्रिणि
राग विवर्धिनि ज्ञानमये
गुणगणवारिधि लोकहितैषिणि
सप्तस्वरावर गाननुते ।
 
m