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देवी स्तोत्राणि
 
सिद्धानन्द - जनस्य चिन्मय -
सुखाकारां महायोगिनीम्
मायाविश्व - विमोहिनीं मधुमतीं
ध्यायेच्छुभां ब्राह्मणीम् ।
 
ध्येयां किन्नर - सिद्धचारण-
वधूध्येयां सदा योगिभिः
कामाक्षीं कलयामि कल्पलतिकां
काञ्चीपुरी - देवताम् ।
 
कामारिकामां कमलासनस्थां
 
काम्यप्रदां कङ्कणचूडहस्ताम् ।
 
काञ्चीनिवासां कनकप्रभासां
कामाक्षिदेवीं कलयामि चित्ते ॥
 
॥ इति श्री कामाक्षी स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥
 
१६. श्री मूकांबिका स्तोत्रम्
 
मूलांभोरुह मध्यकोण
विलसद्वन्दूक रागोज्ज्वलां
ज्वालाजाल जितेन्दु - कान्ति
 
लहरी - मानन्द - सन्धायिनीम् ।
एला- लालित नील - कुन्तलधरां
 
नीलोत्पलाभां शुकां
कोल्लूराद्रि-निवासिनीं भगवतीं
 
ध्यायामि मूकाम्बिकाम् ॥
 
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