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स्मरेत्प्रथम- पुष्पिणीं
देवी स्तोत्राणि
रुधिर-बिन्दु- नीलाम्बरां
गृहीत- मधुपात्रिकां
मधुविघूर्ण - नेत्रां - चलाम् ।
घनस्तनभरोन्नतां गलित-
चूलिकां श्यामलां
त्रिलोचन - कुटुम्बिनीं त्रिपुर-
सुन्दरीम् आश्रये ॥
सकुङ्कुम-विलेपना-
मलकचुंबि- कस्तूरिकां
समन्द - हसितेक्षणां सशर-
चाप-पाशाङ्कुशाम् ।
अशेष - जनमोहिनीम् अरुण-
माल्य-भूषाम्बरां
जपाकुसुम - भासुरां
जपविधौ स्मरेदम्बिकाम् ॥
पुरन्दर- पुरन्ध्रिका - चिकुर-
बन्धसैरन्ध्रिकां
पितामह - पतिव्रतां
पटुपटीर-चर्चारताम् ।
मुकुन्द - रमणीं मणिल-
सदलक्रियाकारिणीं
भजामि भुवनाम्बिकां सुरवधूटिका - चेटिकाम् ॥
॥ इति त्रिपुरसुन्दरी अष्टक स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥
स्मरेत्प्रथम- पुष्पिणीं
देवी स्तोत्राणि
रुधिर-बिन्दु- नीलाम्बरां
गृहीत- मधुपात्रिकां
मधुविघूर्ण - नेत्रां - चलाम् ।
घनस्तनभरोन्नतां गलित-
चूलिकां श्यामलां
त्रिलोचन - कुटुम्बिनीं त्रिपुर-
सुन्दरीम् आश्रये ॥
सकुङ्कुम-विलेपना-
मलकचुंबि- कस्तूरिकां
समन्द - हसितेक्षणां सशर-
चाप-पाशाङ्कुशाम् ।
अशेष - जनमोहिनीम् अरुण-
माल्य-भूषाम्बरां
जपाकुसुम - भासुरां
जपविधौ स्मरेदम्बिकाम् ॥
पुरन्दर- पुरन्ध्रिका - चिकुर-
बन्धसैरन्ध्रिकां
पितामह - पतिव्रतां
पटुपटीर-चर्चारताम् ।
मुकुन्द - रमणीं मणिल-
सदलक्रियाकारिणीं
भजामि भुवनाम्बिकां सुरवधूटिका - चेटिकाम् ॥
॥ इति त्रिपुरसुन्दरी अष्टक स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥