2026-05-19 04:09:19 by ambuda-bot
This page has not been fully proofread.
38
देवी स्तोत्राणि
मुच्यते नात्र सन्देहो भुवि स्वर्गे रसातले ।
सर्वं वा श्लोकमेकं वा यः पठेद्भक्तिमान् सदा ॥
स सर्वं दुष्कृतं त्यक्त्वा प्राप्नोति परमं पदम् ।
पठनादस्य देवेशि किं न सिध्यति भूतले ॥
स्तवराजमिदं देवि संक्षेपात्कथितं मया ॥
॥ इति आपदुद्धारक दुर्गा स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥
१०. त्रिपुरसुन्दरी अष्टक स्तोत्रम्
कदम्बवन-चारिणीं
मुनि-कदम्बकादंबिनीं
नितम्ब -जित-भूधरां
सुरनितंबिनी - सेविताम् ।
नवांबुरुह - लोचना-
मभिनवांबुद - श्यामलां
त्रिलोचन-कुटुम्बिनीं
त्रिपुरसुन्दरीम् आश्रये ॥
कदम्बवन-वासिनीं
कनक - वल्लकी - धारिणीं
महार्हमणि -हारिणीं
मुख- समुल्लसद्वारुणीम् ।
दयाविभव - कारिणीं
विशद - लोचनीं चारिणीं
त्रिलोचन - कुटुम्बिनीं
त्रिपुरसुन्दरीम् - आश्रये ॥
११
१२
m
१३
९
देवी स्तोत्राणि
मुच्यते नात्र सन्देहो भुवि स्वर्गे रसातले ।
सर्वं वा श्लोकमेकं वा यः पठेद्भक्तिमान् सदा ॥
स सर्वं दुष्कृतं त्यक्त्वा प्राप्नोति परमं पदम् ।
पठनादस्य देवेशि किं न सिध्यति भूतले ॥
स्तवराजमिदं देवि संक्षेपात्कथितं मया ॥
॥ इति आपदुद्धारक दुर्गा स्तोत्रम् संपूर्णम् ॥
१०. त्रिपुरसुन्दरी अष्टक स्तोत्रम्
कदम्बवन-चारिणीं
मुनि-कदम्बकादंबिनीं
नितम्ब -जित-भूधरां
सुरनितंबिनी - सेविताम् ।
नवांबुरुह - लोचना-
मभिनवांबुद - श्यामलां
त्रिलोचन-कुटुम्बिनीं
त्रिपुरसुन्दरीम् आश्रये ॥
कदम्बवन-वासिनीं
कनक - वल्लकी - धारिणीं
महार्हमणि -हारिणीं
मुख- समुल्लसद्वारुणीम् ।
दयाविभव - कारिणीं
विशद - लोचनीं चारिणीं
त्रिलोचन - कुटुम्बिनीं
त्रिपुरसुन्दरीम् - आश्रये ॥
११
१२
m
१३
९