Proofing

This page has not been fully proofread.

110
 
देवी स्तोत्राणि
 
धान्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरणभूषिते ।
धान्यं देहि धनं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
 
मेधालक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलिकल्मष नाशिनी ।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
गजलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेवस्वरूपिणी ।
अश्वांश्च गोकुलं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ।
वीरलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वकार्य जयप्रदे ।
वीर्यं देहि बलं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
जयलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्ति स्वरूपिणी ।
जयं देहि शुभं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
भाग्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्य विवर्धिनी ।
भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
कीर्तिलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णु वक्षस्थल - स्थिते ।
कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
आरोग्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व- रोग - निवारिणी ।
आयुर्देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
 
सिद्धलक्ष्मी नमस्तेऽस्तु सर्वसिद्धि प्रदायिनी ।
सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
सौन्दर्यलक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कार शोभिते ।
रूपं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
साम्राज्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्ति-मुक्ति प्रदायिनी ।
मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्वकामांश्च देहि मे ॥
 

 

 

 
१०
 
११
 
१२
 
१३
 
१४
 
१५