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2023-02-16 08:39:29 by श्री अयनः चट्टोपाध्यायः

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अंबसमी -- गूंदा हुआ बासी गीला आटा ( दे १।३७ ) ।
अंबाडग– -- बहुबीज वाला आम्रातक फल ( प्रज्ञा १।३६ ) ।
अंबाडगधूवि— -- खाद्यपदार्थ-विशेष (अंवि पृ ७१) ।
अंबाडिय -- तिरस्कृत ( बूटी पृ ५४ ) ।
अंबिर -- आम्र ( दे १।१५ ) ।
अंबिलिका -- इमली ( अंवि पृ ७० ) ।
अंबुसु -- सिंह से भी अति बलवान पशु, शरभ ( दे १।११ ) ।
अंबेट्टिआ– -- मुष्टिद्यूत, बालकों द्वारा मुट्ठी से खेला जाने वाला जूआ -- ' मा रम
अंबेट्टिआइ पुत्त ! तुमं' ( दे १।७ वृ) ।
अंबेट्टी– -- मुष्टिद्यूत, बच्चों की क्रीडा-विशेष जो 'एकीबेकी' के रूप में खेली
जाती है (दे १।७) ।
अंबेल्ली -- खट्टी राब-'एहि किराइं सीतलीहोति अंबेल्ली'
(आवचू १ पृ १११) ।
अंबेसी –-- घर का द्वार-फलक (१।८)।
अंबोच्ची– -- फूलों को चुनने वाली स्त्री ( दे १।९) ।
अकंडतलिम –-- १ नि:स्नेह । २ अविवाहित (दे १।६०) ।
अकरंडुय- मांस के उपचित होने के कारण जिसके पीठ के पास की हड्डी
दिखाई न पड़े ( प्र ४।७ टी प ८१ )।
अकारय -- भोजन की अरुचि, रोग-विशेष (ज्ञा १।१३।२८ ) ।
अकासि -- निषेध-सूचक अव्यय, पर्याप्त ( दे १।८ ) ।
अकोप्प -- रम्य ( प्र ४।८) ।
अक्क -- दूत ( दे १।६ ) ।
अक्कंत -- प्रवृद्ध, बढ़ा हुआ ( दे १।९) ।
अक्कंद –-- परित्राता, रक्षा करने वाला ( दे १।१५ ) ।
अक्कबोंदि –-- वल्ली विशेष ( भ २२।६ ) ।
अक्कसाला- -- १ बलात्कार । २ उन्मत्त-सी स्त्री ( दे १।५८)।
अक्का –-- भगिनी, बहिन ( दे ११६ ) । अक्का (कन्नड)।
अक्कुट्ठ -- अध्यासित, अधिष्ठित ( दे १।११ ) ।
अक्कोड –-- बकरा (दे १।१२)।
अक्कोडिय -- चुभाना, घुसाना- 'तंबियाओ सुईओ••••वीससु वि अंगुलीनहेसु
अक्कोडियाओ' (बृटी पृ ५७)।