2023-02-16 05:02:55 by श्री अयनः चट्टोपाध्यायः

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देशी शब्दकोश
 
अंगारइय -- घुण कीट द्वारा खाया हुआ— 'घुणकाणियं अंगारइयं वा वुत्तयं होति' (निचू ४ पृ ६६) ।
अंगालिअ-- ईख का टुकड़ा, गंडेरी ( दे १।२८) ।
अंगुजट्ठ -- अंगूठा (आचू पृ ३५२ ) ।
अंगुट्ठी -- १ घूंघट - 'रंगम्मि नच्चियाए, अलाहि अंगुट्ठिकरणेणं' ( उसुटी प ५४; दे १।६) । २ अंगूठा ( प्रसा २०० ) ।
अंगुत्थल -- अंगूठी (दे १।३१) ।
अंगुलिणी -- प्रियंगु, वृक्ष - विशेष ( दे १ । ३२ ) ।
अंगोहली -- १ देश-स्नान, शरीर को पोंछना, हाथ-मुंह आदि धोना (नंदीटि पृ १३४) ।
अंगोहलेऊण -- देश-स्नान कराकर - 'अंगोहलेऊण दारगं पेसेइ'
( व्यभा १० टी प ५२ )।
अंघोलि -- देश-स्नान, शरीर को पोंछना, हाथ-मुंह आदि धोना
(आवचू १ पृ ५४५) ।
अंचित -- दुर्भिक्ष - 'अंचितं नाम दुर्भिक्षम्' (आवटि प ५३ ) ।
अंचिय -- १ नाट्य का एक प्रकार - 'नटं चउव्विहं-अंचियं रिभियं आरभडं
भसोलं ति' (निचू ४ पृ २) । २ दुर्भिक्ष ( निचू २ पृ ११९) ।
अंछण -- विस्तार, फैलाव (निचू २ पृ २२३) ।
अंछणय -- विस्तार, फैलाव ( निभा १५२९) ।
अंछणिका -- रज्जु- विशेष ( अंवि पृ ११५) ।
अंछिय -- आकृष्ट, खींचा हुआ ( प्र १।२९; दे १।१४) ।
अंजणइसिआ -- तमाल का वृक्ष ( दे १ । ३७) ।
अंजणई -- वल्ली विशेष (प्रज्ञा १।४०।५ ) ।
अंजणईस -- तमाल का वृक्ष (दे १ । ३७ ) ।
अंजणिआ -- तमाल का वृक्ष ( दे १ । ३७ )।
अंजणी -- १ आभूषण - विशेष ( अंवि पृ १।८३ ) । २. भांड-विशेष
( अंवि पृ २६० ) ।
अंजणेकसक -- वनस्पति विशेष (अंवि पृ ७० ) ।
अंजस -- ऋतु ( दे १।१४) ।
अंडअ -- मत्स्य ( दे १।१६ )।
अंतरिज्ज -- कटीसूत्र, करधनी ( दे १ । ३५ )।
 
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