देशीशब्दकोश /629
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५६०
वाहिप्प (व्या + ह) – आह्वान करना ( ति ७२५) ।
वाहुड - चलना ।
विअक्ख ( वि + ईक्ष ) – देखना (ओभा १८८) ।
विअट्ट (विसं + वद् ) – अप्रमाणित करना ( प्रा ४।१२६ ) ।
विअल (ओजय् ) -- मजबूत होना ।
विआय ( वि + जनय् ) – जन्म देना । (वियावं - गुज) ।
विउड ( वि + नाशय् ) – विनाश करना ( प्रा ४।३१) ।
विचिण-विदारित करना ।
विछ ( वि + घट् ) – अलग होना ।
विंट (वेष्टय् ) –वेष्टन करना, लपेटना । (विटवुं गुज ) ।
विकड्ड – खींचना ।
विक्के ( वि + क्री ) – बेचना (प्रा ४१५२ ) ।
विक्खर ( वि + कृ ) – १छितरना । २ बिखेरना । ३ इधर उधर फेंकना ।
विक्खिर (वि + कृ) - बिखेरना, फैलाना (बृचू प १४१ ) ।
विक्खोड - निन्दा करना । ( वखोडवुं गुज ) ।
विखुड्ड – क्रीड़ा करना (आवहाटी २ पृ १४७) ।
:
विग्गोव - निंदा करना ।
-
देशी शब्दकोश
विधुम्म ( वि + घूर्णय् ) – डोलना ।
विच्च ( वि + अय्) - व्यय करना ।
विच्च - समीप में आना ।
विच्छ – विदारित करना ।
विच्छिप्प (वि स्पृश् ) – विशेष रूप से स्पर्श करना ( भ६।२०६ ) ।
विच्छिव (वि + स्पृश् ) - विशेष रूप से स्पर्श करना ।
विच्छुह (वि + क्षिप् ) – फेंकना ( से १० । ७३) ।
विच्छोल ( कम्पयू ) – कंपित करना ( प्रा ४१४६) ।
विच्छोव-वियुक्त करना, विरहित करना ।
विज्झ ( वि + घट्) - अलग होना ।
विट्टाल — अपवित्र करना, भ्रष्ट करना - अहो इमे असुइणो सव्वलोगं
विट्टालेंति' (निचू २ पृ २२६ ) ।
विट्ठ --- अर्जित करना ।
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वाहिप्प (व्या + ह) – आह्वान करना ( ति ७२५) ।
वाहुड - चलना ।
विअक्ख ( वि + ईक्ष ) – देखना (ओभा १८८) ।
विअट्ट (विसं + वद् ) – अप्रमाणित करना ( प्रा ४।१२६ ) ।
विअल (ओजय् ) -- मजबूत होना ।
विआय ( वि + जनय् ) – जन्म देना । (वियावं - गुज) ।
विउड ( वि + नाशय् ) – विनाश करना ( प्रा ४।३१) ।
विचिण-विदारित करना ।
विछ ( वि + घट् ) – अलग होना ।
विंट (वेष्टय् ) –वेष्टन करना, लपेटना । (विटवुं गुज ) ।
विकड्ड – खींचना ।
विक्के ( वि + क्री ) – बेचना (प्रा ४१५२ ) ।
विक्खर ( वि + कृ ) – १छितरना । २ बिखेरना । ३ इधर उधर फेंकना ।
विक्खिर (वि + कृ) - बिखेरना, फैलाना (बृचू प १४१ ) ।
विक्खोड - निन्दा करना । ( वखोडवुं गुज ) ।
विखुड्ड – क्रीड़ा करना (आवहाटी २ पृ १४७) ।
:
विग्गोव - निंदा करना ।
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देशी शब्दकोश
विधुम्म ( वि + घूर्णय् ) – डोलना ।
विच्च ( वि + अय्) - व्यय करना ।
विच्च - समीप में आना ।
विच्छ – विदारित करना ।
विच्छिप्प (वि स्पृश् ) – विशेष रूप से स्पर्श करना ( भ६।२०६ ) ।
विच्छिव (वि + स्पृश् ) - विशेष रूप से स्पर्श करना ।
विच्छुह (वि + क्षिप् ) – फेंकना ( से १० । ७३) ।
विच्छोल ( कम्पयू ) – कंपित करना ( प्रा ४१४६) ।
विच्छोव-वियुक्त करना, विरहित करना ।
विज्झ ( वि + घट्) - अलग होना ।
विट्टाल — अपवित्र करना, भ्रष्ट करना - अहो इमे असुइणो सव्वलोगं
विट्टालेंति' (निचू २ पृ २२६ ) ।
विट्ठ --- अर्जित करना ।
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