देशीशब्दकोश /329
This page has been fully proofread once and needs a second look.
पंजर -- १ आचार्य, उपाध्याय, प्रवर्तक, स्थविर और गणावच्छेदक-इन पांचों
पंडरंग -- १ शिवभक्त संन्यासी (
(
पंडरकुड्डग -- ग्वालों की जाति विशेष-अम्हे पंडरकुड्डगा रायगिहे गोवाला
देशी शब्दकोश
पंडविअ -- जलार्द्र, पानी से भीगा हुआ ( दे ६।२० ) ।
पंडु
पंडुइय
(
पंडुल्लुइय -- पांडुर वर्ण वाला ( आवचू १ पृ २०
पंतावणा -- लकड़ी, मुष्टि आदि से मारना - यष्टिमुष्ट्यादिभिस्ताडना'
(
पंति
पंथ
पंथुच्छुहणी -- ससुराल से पहली बार आनीत वधू ( दे ६
पंथोलग -- क्षुद्र जंतु
पंपुअ -- दीर्घ ( दे ६
-
पंपोट -- बहुबीज वाली वनस्पति ( प्रसाटी प ५८ ) ।
पंफुल्लिअ
रोका
पंसुल -- १ कोयल, कोकिल । २ जार, उपपति ( दे ६।६६) । ३ रुद्ध,
पंसुलिगा -- पार्श्
पंसुलिया -- पार्श्व की हड्डी ( प्रसाटी
-
पंसुली
पक्क -- १ दृप्त, उन्मत्त । २ समर्थ ( दे ६।६४
पक्क-
व्य
पक्कग्गाह
Jain Education International
For Private & Personal Use Only
www.jainelibrary.org