2023-03-14 11:48:37 by श्री अयनः चट्टोपाध्यायः

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छेणक -- १ झाग, फेन । २ कल्लोल ( अंवि पृ २५५ ) ।
छेत्तर -- पुराना छाज आदि गृह उपकरण ( दे ३।३२ ) ।
छेत्तसोवणय -- खेत में जागना ( दे ३।३२ ) ।
छेध -- स्थासक - कुंकुम, चंदन आदि सुगंधित द्रव्यों से दिए गए हाथ के पांचों अंगुलियों के छापे, हस्तबिंब । २ स्थासक - चंदन आदि सुगंधित द्रव्य से शरीर का विलेपन करना । ३ चोर ( दे ३।३९ ) ।
छेप्प -- पूंछ ( विपा १।२।२४ ) ।
छेभअ -- हथेली का थापा, हस्तबिम्ब ( दे ३।३२ ) ।
छेरित्ता -- लीद करके - 'गद्दभी छेरिता गया' ( उसुटी प ७३ ) ।
छेल -- बकरा ( उसुटी प ५४; दे ३।३२ वृ ) ।
छेलअ -- बकरा ( दे ३।३२ ) ।
छेलण -- हर्ष ध्वनि, आनन्द की आवाज - 'छेलणं णाम उक्कट्ठी हसितादि' ( आवचू १ पृ १५७ ) ।
छेलापनक -- बालक्रीडा, उत्कृष्ट हर्षध्वनि, सीत्कार करना आदि - 'छेलापनकमिति देशीवचनमुत्कृष्टबाल क्रीडापनं सेण्टिताद्यर्थवाचकमिति' ( आवहाटी १ पृ ८६ ) ।
छेलावण -- १ उत्कृष्ट हर्षध्वनि । २ बाल क्रीडापन । ३ सीत्कार करना - 'छेलावणमुक्किट्ठाइ बालकीलावणं च सेंटाइ' ( आवमटी प २०१ ) ।
छेलावणय -- हर्ष-ध्वनि, हसना आदि - 'छेलणं णाम उक्कट्ठीहसितादि' ( आवचू १ पृ १५७ ) ।
छेलिंत -- सेंटिका करता हुआ ( अंवि पृ ४६ ) ।
छेलिका -- बकरी ( प्रटी प १५ ) ।
छेलिय -- सेंटित, सीतकार करना, अव्यक्त ध्वनि-विशेष ( प्र ३।५ ) ।
छेलिया -- बकरी ( उसुटी प २४१ ) ।
छेल्लिय -- नाक से छींकने का शब्द ( दजिचू पृ २३९ ) ।
छेली -- थोड़े फूल वाली माला ( दे ३।३१ ) ।
छेवग -- महामारी ( व्या ५ टी प १८ ) ।
छेवट्ट -- संहनन का एक प्रकार, अस्थि-रचना-विशेष ( जीव १।१७ ) ।
छेवट्ठ -- संहनन का एक प्रकार, अस्थि-रचना-विशेष ( स्था ६।३० ) ।