2023-03-05 04:37:47 by श्री अयनः चट्टोपाध्यायः

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खव्व --१ बायां हाथ । २ गधा ( दे २।७७ ) ।

खव्वुल्ल -- मुख ( दे २।६८ ) ।

खसर -- रोग-विशेष, खुजली ( जंबू २१३३) ।
 
-

खस्सिअ
 
-- टखनों तक पहना जाने वाला जूता- 'उवरितला मे फुट्टंति ।
खस्सिताओ से कताओ' ( दअचू पृ ४१) ।
) ।
खाइ -- १ वाक्यालंकार में प्रयुक्त अव्यय । २ पुनः अर्थ का सूचक अव्यय - 'से
कहिं खाइ णं भंते ! सिद्धा परिवसंति ?' ( औप १९२ ) । ३ परिखा
( आव १ पृ ३९ ) ।

खाइआ -- १ परिखा ( दे २।७३) ।
) ।
खाईं -- वाक्यालंकार के रूप में प्रयुक्त अव्यय- - 'से केणं खाईं अट्ठेणं भंते !
एवं वुच्चइ' ( भ १७।२१ ) ।
खाइणं -- वाक्यालंकार में प्रयुक्त अव्यस - 'खाइणं ति देशी-भाषया वाक्यालंकारे'
( औपटी पृ २१८ ) ।
 
देशी शब्दकोश

खाइया -- खाई, खातिका ( भ ५। १९९ ) ।

खाखट्टिका -- सेवई आदि खाद्य पदार्थ विशेष ( अंवि पृ १८२ ) ।
खाडइअ -- प्रतिफलित ( दे २।७३) ।
) ।
खाडइला -- गिलहरी, वह प्राणी जिसके शरीर पर काली और श्वेत धाराएं
होती हैं ( नंदी ३८।४) ।
) ।
खाडलिल्ल -- गिलहरी ( प्रटी प १० ) ।
खाडहिला -- गिलहरी ( प्र १।८ ) ।
खाडहिल्ला -- गिलहरी ( उपाटी पृ ९६ ) ।
खाडहेल्ला -- गिलहरी ( आवहाटी १ पृ २७८)।
 
खात
) ।
खात -
- १ भूमिगृह ( निचू १ पृ ११४ ) । २ कूप, बावड़ी आदि
( आवटि प ५८ ) ।

खातिका -- खाई, परिखा ( प्र १।१४) ।
 
-
) ।
खातोदग -- खुदे हुए जलाशय का पानी ( भ १५।१८६ ) ।

खायं ––-- वाक्यालंकार में प्रयुक्त अव्यय - 'तो खायं अहमवि ओलग्गामि
( बृटी पृ ५३ ) ।
खायर -- खदिर वृक्ष सम्बंधी -
 
'खायरो य सूलो....पादो छिज्जए'
 
(
( निचू १ पृ १६) ।
 
खार
) ।
खार -
- गायों के विचरण करने का वह स्थान जहां तिक्त कुंतल आदि जलाए
जाते हैं, जिससे कि गायों के कीट-जन्य उपद्रव शांत हो जाएं -
 
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