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१३६
 
ग
 
स्तोत्रग्रन्थमाला - तृतीयो भागः
 
गणपतिकविना रचितं स्तोत्रम्
 
गणपतिपण्डितरचितं स्तोत्रम्
 
गणपतिसेवित गुणगणसागर
गणराण्मुखसूरिसभागुरुणा
गत्वा तिष्ठति ना
 
गमय मस्तकात्कुलगृहानलम्
गर्भोऽसमष्टकाव्योयु-
गाणपतमग्नेः सर्वजनहृद्यम्
 
गाणपतमेतद्गीतमतिशुद्धम्
गातारं गणपं गायत्रैर्मुकुलैः
गायत स्तुताद्रियध्वमाश्रयध्वमुत्तमं
 
गायत्रमनघस्तोत्रं गणपतेः
गिरमिमामहं त्रिदशभूपते
 
गीताः कविराजा
गूर्तश्रवा विश्वगूर्तो
गृणत्सदवनप्रकारनिपुणा
गोपायसि विश्वम्
गौरोऽयं गगने
 
घ
 
घटिकाचलमालयमादधता
घटिकाचलवासिनमीशमजम्
घटिकापर्वतवासि नृकेसरी
 
घु ष्यन्नसि रुद्रो दीप्यन्नसि शक्रः
घृ वोजा अविताधीनाम्
 
ङ
 
ङः प्रत्येकं न यथा वाक्ये
 
च
 
चक्षुर्मम शिवः श्रोत्रं मम शिवः
चतुरविरोधिव्रजहृतसाराम्
चतुरास्यस्त्वञ्चक्रधरस्त्वम्
 
८८
 
९४
 
९१
 
१
 
२३, १२५
 
१२३
 
४४
 
१०१
 
१०४
 
१२७
 
११५
 
२९
 
६०
 
१११
 
३९
 
१०६
 
२४, १२७
 
८४
 
८४
 
९१
 
११०
 
३४
 
९१
 
२९
 
१५, २१
 
८८, ९६