2026-01-24 07:18:13 by akprasad
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<ignore lang="sa">श्रीकृष्णाक्षरमालिका
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<verse lang="sa">कमलावल्लभ कमलविलोचन कमलविभाहरपाद हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १८ ॥
</verse>
<verse lang="sa">खरमुखदानवसैनिकखण्डन खेचरकीर्तित कीर्तिहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १९ ॥
</verse>
<verse lang="sa">गणपतिसेवित गुणगणसागर वरगतिनिर्जित नागहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २० ॥
</verse>
<verse lang="sa">घटिकापर्वतवासि नृकेसरि वेषविनाशितदोषहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २१ ॥
</verse>
<verse lang="sa">ङः प्रत्येकं न यथा वाक्ये नाथ तथा ते चित्ते क्रोधः ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २२ ॥
</verse>
<verse lang="sa">चपलाभासुरमेघनिभप्रभ कमलाभासुरवक्ष हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २३ ॥
</verse>
<verse lang="sa">छलयुतदूरचलाचललोचन गोपवधूहृदयेश हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २४ ॥
</verse>
<verse lang="sa">जगतीवल्लभरूपपरात्पर सर्वजगज्जनपूज्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २५ ॥
</verse>
<verse lang="sa">झङ्कारध्वनिकारिमधु<error>वृ</error><fix>व्र</fix>तमञ्जुलकेशकलाप हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २६ ॥
</verse>
<ignore lang="sa">९१
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<ignore lang="sa">श्रीकृष्णाक्षरमालिका
<verse lang="sa">कमलावल्लभ कमलविलोचन कमलविभाहरपाद हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १८ ॥
<verse lang="sa">खरमुखदानवसैनिकखण्डन खेचरकीर्तित कीर्तिहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १९ ॥
<verse lang="sa">गणपतिसेवित गुणगणसागर वरगतिनिर्जित नागहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २० ॥
<verse lang="sa">घटिकापर्वतवासि नृकेसरि वेषविनाशितदोषहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २१ ॥
<verse lang="sa">ङः प्रत्येकं न यथा वाक्ये नाथ तथा ते चित्ते क्रोधः ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २२ ॥
<verse lang="sa">चपलाभासुरमेघनिभप्रभ कमलाभासुरवक्ष हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २३ ॥
<verse lang="sa">छलयुतदूरचलाचललोचन गोपवधूहृदयेश हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २४ ॥
<verse lang="sa">जगतीवल्लभरूपपरात्पर सर्वजगज्जनपूज्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २५ ॥
<verse lang="sa">झङ्कारध्वनिकारिमधु<error>वृ</error><fix>व्र</fix>तमञ्जुलकेशकलाप हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ २६ ॥
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