2026-01-24 07:21:20 by akprasad
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<ignore lang="sa">९०
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<ignore lang="sa">स्तोत्रग्रन्थमाला - तृतीयो भागः
</ignore>
<verse lang="sa">ऋकारप्रिय ऋक्षगणेश्वरवन्दितपादपयोज हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ९ ॥
</verse>
<verse lang="sa">ऌतकसमर्चित काङङ्क्षितदायक कुक्षिगताखिललोकहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १० ॥
लृ</verse>
<verse lang="sa">ॡवल्लोकाचारसमीरित रूपविवर्जित नित्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ११ ॥
</verse>
<verse lang="sa">एकमनोमुनिमानसगोचर गोकुलपालक वेषहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १२ ॥
</verse>
<verse lang="sa">ऐरावतकरसन्निभदोर्बल निर्जितदानवसैन्यहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १३ ॥
</verse>
<verse lang="sa">ओङ्काराम्बुज वनकलहंसक कलिमलनाशन नामहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १४ ॥
</verse>
<verse lang="sa">औन्नत्याश्रय संश्रितपालक पाकनिबर्हणसहजहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १५ ॥
</verse>
<verse lang="sa">अङ्गदसेवित भङ्गविवर्जित सङ्गविवर्जित सेव्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १६ ॥
</verse>
<verse lang="sa">अस्तगिरिस्थितभास्करलोहितचरणसरोजतला<error>ढङ्घ्य</error><fix>ढ्य</fix> हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १७ ॥
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<ignore lang="sa">९०
<ignore lang="sa">स्तोत्रग्रन्थमाला - तृतीयो भागः
<verse lang="sa">ऋकारप्रिय ऋक्षगणेश्वरवन्दितपादपयोज हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ९ ॥
<verse lang="sa">ऌतकसमर्चित का
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १० ॥
लृ
<verse lang="sa">ॡवल्लोकाचारसमीरित रूपविवर्जित नित्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ ११ ॥
<verse lang="sa">एकमनोमुनिमानसगोचर गोकुलपालक वेषहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १२ ॥
<verse lang="sa">ऐरावतकरसन्निभदोर्बल निर्जितदानवसैन्यहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १३ ॥
<verse lang="sa">ओङ्काराम्बुज वनकलहंसक कलिमलनाशन नामहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १४ ॥
<verse lang="sa">औन्नत्याश्रय संश्रितपालक पाकनिबर्हणसहजहरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १५ ॥
<verse lang="sa">अङ्गदसेवित भङ्गविवर्जित सङ्गविवर्जित सेव्य हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १६ ॥
<verse lang="sa">अस्तगिरिस्थितभास्करलोहितचरणसरोजतला<error>ढङ्घ्य</error><fix>ढ्य</fix> हरे ।
कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण जनार्दन कृष्ण हरे ॥ १७ ॥
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