This page has not been fully proofread.

152
 
CĀŅAKYA-RĀJA-NĪTI
 
इङ्गिताकारतत्त्वज्ञो बलवान प्रियदर्शनः ।
 
अप्रमादी सदा दक्षः प्रतीहारः स उच्यते ॥ २२४ ॥
अदीर्घमूत्रः स्मृतिमान् कृतज्ञो नीतिशास्त्रवित् ।
धीमानायतिदर्शी च मन्त्री राज्ञः सुसन्निधिः ॥ २२५ ॥
सकृदुक्त गृहीतार्थो लघुहस्तो जिताक्षरः ।
सर्वशास्त्र समालोकी प्रकृष्टो नाम लेखकः ॥ २२६ ॥
मेधावी वाक्पटुः प्राज्ञः सत्यवादी जितेन्द्रियः ।
 
224. CN 106, CR 5.5, CS 1.60. Also CPS 110.4.
 
Also in GP 1.112.6, SRBh 144.76, IS 1089, SP 1337,
Subh 299, Sskr 53. Also found in RN (P) 12. Also see
NM(T) 7.14.
 
(b) प्रियवाकू Subh.
 
(c) अप्रमाद: CNSIV, CSLd; समयज्ञ: स्वामिभक्त SP, SRBh;
 
1
 
प्रमाथी च GP.
 
(d) प्रतीहारी SRBh; प्रशस्यते [स उ° ] Subh; सम् [स] CRBh II;
इष्यते [उ ° ] SRBh; भूपते: CRP.
 
225. CR 5.15. Also CPS 114.16.
 
(a) °सूत्रो विज्ञश्व CRT; सूत्री CPS.
 
226. CN 102, CS 1.59.
 
Also in SRBh 144.75, IS 6654, Sskr 55. (Cf. Matsya-purāna
ch. 189 in ŚKDr ad लेखक; SP 1336, SRHt 142.2 ) Also found
 
in NM (T) 7.19. Also see RN (P) 14.
 
(b) लघुदीर्घ CNI II; जितेन्द्रिय: SRBh.
 
(c) सर्वशास्त्रसमानेता CNI II; शब्दशास्त्रपरिज्ञाता SRBh; समालोची
(°डी IS) CNI II.
 
(d) एष वै लेखकः स्मृतः CNF; एष लेखक उच्यते (इष्यते SRBh)
CS, SRBh; एष शासनले ° CNPh, CNI I, प्रलिपिले ●
 
CNI II.
 
227. Cv 4.12, CR 5.6. Also CPS 110.5.
 
Also in GP 1.112.7, IS 4977 (v.1.), SP 1336 (v.l.), Subh 136 (v. I. )