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श्लोकानुक्रमणिका
 
३१९
 
V.
 
13
 
भरतो वा भवेद्
 
I.
 
ताते धनुर्नम०
 
I
 
22
 
भ्रमति सलिलं
 
V.
 
तीर्थोदकेन
 
VII.
 
9
 
मङ्गलार्थेऽनया
 
I.
 
तेनोक्तं रुदित०
 
VI.
 
15
 
मद्भुजाकृष्ट०
 
V.
 
तैस्तर्पिताः सुतः
 
v.
 
10
 
मम मातुः प्रियं
 
IV.
 
तैस्तेः प्रवृद्ध ०
 
VII.
 
6
 
मम मातुश्च
 
III.
 
16
 
त्यक्त्वा तां गुरुणा
 
v.
 
I
 
माययापहृते
 
V.
 
त्यक्त्वा स्नेहं
 
III.
 
त्रैलोक्यं दुग्ध
 
I.
 
त्वया राज्यपिण्या
 
III.
 
≈22
 
18
 
मा स्वयं मन्यु०
 
2222365S
 
20
 
24
 
15
 
I.
 
10
 
21
 
मुखमनुपमं
 
IV.
 
8
 
22
 
मेरुश्चलनिव
 
II.
 
1
 
दैत्येन्द्रमान०
 
IV.
 
2
 
यः स्वराज्यं
 
VI.
 
13
 
घोश्वतुर्थी
 
IV.
 
9
 
यत्कृते महति
 
I.
 
23
 
धन्याः खलु वने
 
II.
 
12 यत्सत्यं परि०
 
IV.
 
23
 
नरपतिनिधनं भव०
 
IV.
 
18
 
यथा रामश्व
 
VII.
 
15
 
नरपतिनिधनं मया
 
VI.
 
8 यदि न सहसे
 
I.
 
18
 
नागेन्द्रा यवसा०
 
II.
 
2
 
यस्याः शक्रसमो
 
I.
 
13
 
नारीणां पुरुषाणां
 
I.
 
11
 
यावद् भविष्यति
 
IV.
 
24
 
नियतमनियतात्मा
 
V.
 
7
 
युद्धे येन सुराः
 
V.
 
16
 
निर्घृणश्च कृतघ्न
 
IV.
 
5
 
येनं प्राणाश्व
 
III.
 
8
 
नियोगाद भूपणा०
 
1.
 
26
 
योऽस्याः कर०
 
V.
 
3
 
पक्षाभ्यां परिभूय०
 
VI.
 
3
 
योऽहमुत्पतितो
 
v.
 
20
 
पतत्युत्थाय
 
II.
 
3
 
राज्ये त्वामभिषिच्य
 
II.
 
19
 
पतितमिव शिरः
 
III.
 
3
 
रामं वा शरण०
 
V.
 
18
 
पादोपभुक्ते
 
IV. 25
 
रामलक्ष्मणयो०
 
II.
 
पितुः प्राणपरि०
 
III.
 
4
 
रामेणापि परि०
 
II.
 
पितुर्नियोगा०
 
IV.
 
20
 
रेणुः समुत्पतति
 
VII.
 
पितुर्मे को व्याधिः
 
III.
 
1
 
वक्तव्यं किंचि०
 
III.
 
पितुर्मे नौरसः
 
III.
 
19 वक्षः प्रसारय
 
IV.
 
पित्रा च बान्धव०
 
VI.
 
12
 
वक्षः प्रसारय
 
VII.
 
प्रख्यात सद्गुण ०
 
VI.
 
6
 
वनगमन०
 
I.
 
फलानि दृष्ट्वा
 
v.
 
6 वयमयशसा
 
III.
 
बलादेव दशग्रीवः
 
V. 21 वल्कलैर्हत०
 
III.
 
20
 
भग्नः शक्रः
 
V.
 
17 विचेष्टमानेव
 
VI.
 
554767
 
1722
 
15
 
16
 
14
 
७१