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१०८
प्रतिज्ञा यौगन्धरायणे
व्यक्तं बलं
I.
4. सेनाभिर्मनसा
III.
व्यवहारेष्व
III.
3.
स्त्रीजनेना
IV.
व्रीलितो वञ्चनां
I. 7.
स्नातस्य यस्य
III.
शक्ता दर्पयितुं
III.
5.
त्रिग्धं च सौ
I.
शत्रुं पश्यन्तु
II.
10.
स्निग्धेष्वासज्यं
I.
श्रुतिसुखमधुरा
II.
12.
हत्वा गजानू
IV.
±± ± 6 3 +
4.
24.
4.
6.
3.
4.
सुभद्रामिव
III.
7.
हस्तप्राप्तो हि
IV.
19
५२
प्रतिज्ञा यौगन्धरायणे
व्यक्तं बलं
I.
4. सेनाभिर्मनसा
III.
व्यवहारेष्व
III.
3.
स्त्रीजनेना
IV.
व्रीलितो वञ्चनां
I. 7.
स्नातस्य यस्य
III.
शक्ता दर्पयितुं
III.
5.
त्रिग्धं च सौ
I.
शत्रुं पश्यन्तु
II.
10.
स्निग्धेष्वासज्यं
I.
श्रुतिसुखमधुरा
II.
12.
हत्वा गजानू
IV.
±± ± 6 3 +
4.
24.
4.
6.
3.
4.
सुभद्रामिव
III.
7.
हस्तप्राप्तो हि
IV.
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