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श्लोकानुक्रमणी ।
अग्नि बद्धा वस
अग्निः कक्ष इवो
IV.
11.
नवं शरावं
IV.
2.
II. 11.
न श्रधाभ्युदय
II.
9.
अदत्तेत्यागता
निशितविमल
IV.
3.
II. 7.
परचक्ररना
अर्थशास्त्रगुण
II. 13.
I.
9.
अवसितंनिज
परित्यजाम
IV.
13.
III.
6.
पश्यन्तु मां नर
IV.
7.
II. 8.
अहः समुत्तीर्य
पातु वासवदत्ता
I.
1.
III.
2.
तच्छन्नवे
पीनांसस्य विकृ
I.
8.
IV.
8.
उन्मत्तसदृशो
I.
17.
पुरुषं प्रेष
I.
2.
एतत् तन्न्यङ्गम
I.
10.
पूर्वं तावद् युद्ध
I.
13.
एतानि तान्याप
पूर्वं तावद् वैर
II. 14.
I. 12.
एवं रुधिर
IV. 15.
एक शोकप्रतो
भवतां चाग्रतो
भवन्त्वरजसो
IV.
20.
IV. 25.
I. 15.
कथमगणित
भारतानां कुले
IV.
17.
I. 11.
द्वाक्यैः परि
IV. 12.
कन्याया वर
II. 5.
मन्त्रित्वे वञ्चितो
कामं या तस्य
IV. 14.
II.
6.
कारणैर्बहुभिः
मम हयखुर
II.
3.
IV. 21.
काष्ठादग्निर्जा
यथा नरस्याकु
I. 5.
I.
18.
कुल तावच्छ्लायं
यदस्य चाज्ञां
IV. 18.
II.
4.
यदि तां चैव
III.
8.
को नु खल्वेष
IV.
गृह न निवन्ति
23. यदि शत्रुबल
I. 16.
IV.
22.
या सा मल्लिक
IV.
16.
चिरमरिन गरे
IV.
9.
रिपुगतमपनीय
IV.
5.
वच्छविसेस
III.
1.
रिपुनृपनगरे
I.
14.
दूर्वाङ्करस्तिमि
II.
2.
वैरं भयं परि
IV. 6.
घण्णा सुराहि
IV.
I.
व्यक्तं न तावत्
II.
1.
५१
अग्नि बद्धा वस
अग्निः कक्ष इवो
IV.
11.
नवं शरावं
IV.
2.
II. 11.
न श्रधाभ्युदय
II.
9.
अदत्तेत्यागता
निशितविमल
IV.
3.
II. 7.
परचक्ररना
अर्थशास्त्रगुण
II. 13.
I.
9.
अवसितंनिज
परित्यजाम
IV.
13.
III.
6.
पश्यन्तु मां नर
IV.
7.
II. 8.
अहः समुत्तीर्य
पातु वासवदत्ता
I.
1.
III.
2.
तच्छन्नवे
पीनांसस्य विकृ
I.
8.
IV.
8.
उन्मत्तसदृशो
I.
17.
पुरुषं प्रेष
I.
2.
एतत् तन्न्यङ्गम
I.
10.
पूर्वं तावद् युद्ध
I.
13.
एतानि तान्याप
पूर्वं तावद् वैर
II. 14.
I. 12.
एवं रुधिर
IV. 15.
एक शोकप्रतो
भवतां चाग्रतो
भवन्त्वरजसो
IV.
20.
IV. 25.
I. 15.
कथमगणित
भारतानां कुले
IV.
17.
I. 11.
द्वाक्यैः परि
IV. 12.
कन्याया वर
II. 5.
मन्त्रित्वे वञ्चितो
कामं या तस्य
IV. 14.
II.
6.
कारणैर्बहुभिः
मम हयखुर
II.
3.
IV. 21.
काष्ठादग्निर्जा
यथा नरस्याकु
I. 5.
I.
18.
कुल तावच्छ्लायं
यदस्य चाज्ञां
IV. 18.
II.
4.
यदि तां चैव
III.
8.
को नु खल्वेष
IV.
गृह न निवन्ति
23. यदि शत्रुबल
I. 16.
IV.
22.
या सा मल्लिक
IV.
16.
चिरमरिन गरे
IV.
9.
रिपुगतमपनीय
IV.
5.
वच्छविसेस
III.
1.
रिपुनृपनगरे
I.
14.
दूर्वाङ्करस्तिमि
II.
2.
वैरं भयं परि
IV. 6.
घण्णा सुराहि
IV.
I.
व्यक्तं न तावत्
II.
1.
५१