This page has been fully proofread once and needs a second look.

अवन्तिसुन्दरी ।
 
२१९
 
उत्तानशयो यः कलप्रवाबीर्यो कृषावन्नाश्रमहरिणपोत काय आषाढी मोखलीर-
श्वेदानीं विदितवेदितव्यो वर्तसे सर्वावर्तस्थः सम एवासि खेहमपास्य निर्वि-
वेकस्य स्त्री हृदयस्य ....... [^1] नेदानीमभिहतममृतमिवाभ्यवहार्य प्रयासे वा

प्रीणयिष्यति ...... [^2] चिन्तयति सत्यप्येव श्रुत्वापि तथा तप्तवचोमिः प्रवास:

प्रवास मिवासुभिस्त्वमग्रजविरहमविषयं विषह्यदत्त ....... [^3
 
] यस्याः स्फुटन्तं
 
वेकस्य स्त्री हृदयस्य
 
2
 
...
 
प्रवास मिवासुभिस्त्वमग्रजविरहमविषयं विषह्यदत्त

पुटपाकमिव शोकशापवत्यकस्मा दङ्ग
 
....... [^4] तो त्वया
 
च त्वत्सुहृद्भिश्च

5
 
6
 
परस्परसुख बलात्कार कृष्टपीतौ तदनुवृत्तद्रावितहृदयानापकारपयोधरा दृश्यपि
........ [^5] सानमभ्युदनुजाने पुनदर्शनाश ......... [^6] बलानां चासूनां न कथञ्चन
स्खण्डनीया मनोरथा इतिपर्यश्रुणा मुखेन पादयोः पिपति
 
ष्यन्तीं मातर-
8
 
स्तोयव
 
1
 
9
 
.....
 
********

मतिसमग्रं गृहीतहस्तद्वयो यन्त्रित इव किञ्चिदं
 
…………....
...... [^7] स्तोयव ........... [^8]
ब्याजहार (?) । किं फलमम्ब ! वैकत्र्यमेष धर्मः प्राकृतप्रकादानां यदेवंविधेषु
वैधुर्यमाया खलु धैर्यमेवावकाशेऽपि शोकस्याश्रयति, स्मर पृथा सा प्रस्थितेष्वपि

7
 
....
 
........
 

 
........ [^9] योदश समाः समाधिमास्थायास्थितारातिनगराय, अढमत्रा-
प्य (त्र्य ?) पायशङ्कया वयस्यवर्गपरिवृतस्य हि मम सेयमुद्यान विहारवर्णपुष्पोद्भवा-
कथयतामवो
नाम पितरो मातरश्च कियति कियति ..... [^
10
 
] स्ववर्तन्तमा ........ [^11] कथयतामवो
 
11
 
*
 
नाम पितरो मातरश्च कियति कियति स्ववर्तवमा

मुहुरस्याभिरागमितास्तदमे सर्वकृतानामद्विष्या भव पत्नीरपारावचरापारपातिनो
 
-----------------------------------------------------------------------------------------
[^1]. Space for 12 letters left blank.
[^2]. L. about 2 letters.
[^3]. Space for 12 letters left blank.
[^4]. L. about 4 letters.
[^5]. Space for 12 letters left blank.
[^6]. L. about 4 letters.
[^7]. Space for 8 letters left blank.
[^8]. L. about 4 letters.
[^9]. Space for 14 letters left blank.
[^10]. L. about 2 letters.
[^11]. Space for 8 letters left blank.